Punjab News: 7 जून 2026 को Sri Harmandir Sahib से जारी हुकमनामा श्री गुरु ग्रंथ साहिब के अंग 877 से लिया गया। यह पावन वाणी Guru Nanak Dev Ji द्वारा रचित राग रामकली से संबंधित है। हुकमनामे में मनुष्य को प्रभु के नाम, सेवा और सत्संग के महत्व को समझाने का संदेश दिया गया है।
प्रभु के शब्द से जोड़ने की सीख
हुकमनामे में गुरु साहिब बताते हैं कि सच्चा साधक वही है जो अपने मन और चेतना को प्रभु के शब्द से जोड़ता है। मनुष्य को बाहरी दिखावे या केवल धार्मिक वेशभूषा पर निर्भर नहीं रहना चाहिए, बल्कि अपने भीतर प्रभु की उपस्थिति को महसूस करना चाहिए। जब इंसान गुरबाणी के संदेश को जीवन में अपनाता है, तब उसका जीवन सही दिशा में आगे बढ़ता है।
नाम ही सबसे बड़ी दौलत
गुरु नानक देव जी की वाणी में कहा गया है कि प्रभु का नाम ही सबसे बड़ी भिक्षा और सबसे बड़ा धन है। मनुष्य को अपने जीवन में विनम्रता अपनाकर प्रभु के नाम की प्राप्ति के लिए प्रयास करना चाहिए। सांसारिक वस्तुएं और पद कुछ समय के लिए सुख दे सकते हैं, लेकिन स्थायी शांति केवल प्रभु के नाम से ही मिलती है।
संतों की संगति का महत्व
हुकमनामे में यह भी बताया गया है कि संसार में अनेक साधु, योगी, संत और ज्ञानी पुरुष हैं। यदि मनुष्य ऐसे लोगों की संगति प्राप्त करे और उनके बताए मार्ग पर चले, तो उसका मन प्रभु की सेवा और भक्ति में लग सकता है। अच्छी संगति व्यक्ति के विचारों और जीवन को सकारात्मक दिशा देती है।
संसार में रहते हुए भी रहें प्रभु से जुड़े
गुरु साहिब यह संदेश देते हैं कि इंसान को संसार के कार्य करते हुए भी अपने मन को प्रभु से जोड़कर रखना चाहिए। जैसे कमल का फूल पानी में रहकर भी उससे प्रभावित नहीं होता, वैसे ही भक्त संसार में रहते हुए भी मोह-माया से ऊपर उठ सकता है। जो व्यक्ति प्रभु के नाम और भक्ति में जुड़ा रहता है, वह जीवन की कठिनाइयों का सामना भी सहजता से कर लेता है।
जीवन को सही दिशा देने वाला संदेश
आज का हुकमनामा हमें याद दिलाता है कि सच्ची सफलता धन या प्रतिष्ठा में नहीं, बल्कि प्रभु के नाम, सेवा, विनम्रता और सत्संग में है। गुरु नानक देव जी की यह वाणी मनुष्य को आत्मिक शांति, सकारात्मक सोच और मानवता की राह पर चलने की प्रेरणा देती है। यही संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना सदियों पहले था।

