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Punjab News: Hampton Sky Realty का बयान: मोबाइल फोन निर्यात पूरी तरह वैध, सभी लेन-देन बैंकिंग चैनलों से हुए

पंजाब
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Punjab News: हैम्पटन स्काई रियल्टी लिमिटेड (पूर्व में रितेश प्रॉपर्टीज एंड इंडस्ट्रीज लिमिटेड) ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) की हालिया कार्रवाई के बीच आधिकारिक बयान जारी करते हुए अपने मोबाइल फोन निर्यात कारोबार को पूरी तरह वैध बताया है। कंपनी ने कहा कि उसने सभी लेन-देन कानूनी प्रक्रियाओं और बैंकिंग चैनलों के माध्यम से किए हैं तथा मामले में वह सभी जांच एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग कर रही है।

‘मेक इन इंडिया’ और PLI योजना के तहत शुरू किया कारोबार

कंपनी ने कहा कि भारत सरकार द्वारा मोबाइल फोन निर्माण और निर्यात को ‘मेक इन India’ और PLI योजना के तहत प्राथमिकता दी गई है। इसी को ध्यान में रखते हुए कंपनी ने मई 2023 में मोबाइल फोन निर्यात कारोबार में प्रवेश किया था।

बयान के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2014-15 में भारत का मोबाइल निर्यात कारोबार लगभग 1,500 करोड़ रुपये था, जो 2024-25 में बढ़कर करीब 2 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) भारतीय मोबाइल निर्यात का दूसरा सबसे बड़ा बाजार है।

44 हजार से अधिक मोबाइल यूनिट्स के निर्यात का दावा

कंपनी ने दावा किया कि निर्यात अवधि के दौरान उसने कुल 44,471 यूनिट्स का निर्यात किया, जिनमें प्रमुख रूप से एप्पल आईफोन, एयरपॉड्स, सैमसंग और वनप्लस के उत्पाद शामिल थे।

कंपनी के अनुसार सभी निर्यात कई स्तरों पर स्वतंत्र एजेंसियों और अधिकारियों द्वारा सत्यापित किए गए थे, जिनमें—

  • दिल्ली एयर कार्गो कॉम्प्लेक्स (ACC) में कस्टम जांच
  • ICEGATE सिस्टम पर IMEI स्कैनिंग
  • एप्पल और सैमसंग के वैश्विक एक्टिवेशन डेटाबेस से सत्यापन
  • UAE कस्टम्स द्वारा इंपोर्ट एंडोर्समेंट
  • अधिकृत बैंकों द्वारा जारी बैंक रियलाइजेशन सर्टिफिकेट (BRC)

शामिल हैं।

IMEI सत्यापन को बताया सबसे बड़ा प्रमाण

कंपनी ने कहा कि प्रत्येक मोबाइल फोन का एक यूनिक 15 अंकों का IMEI नंबर होता है, जिसे बदला या फर्जी नहीं बनाया जा सकता। कंपनी का दावा है कि निर्यात किए गए 16,391 हैंडसेट्स के IMEI नंबर एप्पल और सैमसंग द्वारा स्वतंत्र रूप से सत्यापित किए गए और ये भारत से बाहर एक्टिवेट पाए गए।

कंपनी के मुताबिक यह तथ्य निर्यात की वास्तविकता को साबित करता है।

‘राउंड ट्रिपिंग’ के आरोपों को किया खारिज

हैम्पटन स्काई रियल्टी ने बयान में कहा कि निर्यात से प्राप्त पूरी राशि अधिकृत बैंकिंग चैनलों के जरिए भारत में प्राप्त हुई और सप्लायर्स को भुगतान भी बैंकिंग माध्यम से किया गया। कंपनी ने कहा कि विदेशों में कोई राशि नहीं रोकी गई और न ही किसी गुप्त खाते में भेजी गई।

कंपनी के अनुसार ऐसे में “राउंड ट्रिपिंग” या “फर्जी निर्यात” के आरोपों का कोई आर्थिक आधार नहीं बनता।

GST विवाद में खुद को बताया पीड़ित

कंपनी ने कहा कि जांच में जिन GST इनपुट टैक्स क्रेडिट मामलों का उल्लेख किया जा रहा है, वे कुछ घरेलू सप्लायर्स से जुड़े हैं और कंपनी स्वयं कथित धोखाधड़ी की पीड़ित है।

बयान में कहा गया कि कंपनी ने 17 मई 2025 को लुधियाना के फोकल प्वाइंट थाने में SK Enterprises, Global Traders और GMG TradeLink Pvt Ltd के खिलाफ FIR दर्ज कराई थी।

‘सरकारी खजाने को कोई नुकसान नहीं’

कंपनी ने दावा किया कि GST अधिकारियों द्वारा उठाए गए मुद्दों से संबंधित राशि पहले ही जमा कराई जा चुकी है और मामला अपीलीय मंच पर विचाराधीन है। कंपनी के अनुसार उसके लेन-देन से सरकारी खजाने को कोई वास्तविक नुकसान नहीं हुआ है।

जांच एजेंसियों के साथ सहयोग जारी

अंत में कंपनी ने कहा कि वह सभी कानूनी संस्थाओं के साथ पूरा सहयोग कर रही है और उचित मंचों पर सभी दस्तावेज एवं रिकॉर्ड प्रस्तुत करेगी। कंपनी ने न्यायपालिका और कानूनी प्रक्रिया पर भरोसा जताते हुए कहा कि उसे विश्वास है कि सच्चाई सामने आएगी।