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Chhattisgarh News: भीषण गर्मी में वन्यजीवों के लिए ‘संजीवनी’ बना बारनवापारा अभयारण्य

छत्तीसगढ़
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Chhattisgarh News: छत्तीसगढ़ की तेज गर्मी के बीच Barnawapara Wildlife Sanctuary वन्यजीव संरक्षण का एक बेहतरीन उदाहरण बनकर उभरा है। जब प्राकृतिक जल स्रोत सूखने लगते हैं, तब यहां अपनाई गई वैज्ञानिक जल प्रबंधन प्रणाली वन्यजीवों के लिए जीवनदायिनी साबित हो रही है।

हर 5 वर्ग किलोमीटर में पानी की उपलब्धता

अभयारण्य प्रबंधन ने पूरे क्षेत्र की वैज्ञानिक मैपिंग कर 240 से अधिक जल स्रोतों की पहचान की है। इनमें तालाब, स्टॉप डैम, वॉटरहोल और कृत्रिम सॉसर शामिल हैं। योजना इस तरह बनाई गई है कि हर 5 वर्ग किलोमीटर के दायरे में पानी उपलब्ध रहे, ताकि जानवरों को दूर तक भटकना न पड़े।

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तकनीक आधारित स्मार्ट मॉनिटरिंग

यह मॉडल सिर्फ पानी उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी तरह डेटा और तकनीक पर आधारित है।

  • हर 15 दिन में जल स्तर की जांच
  • ‘स्टाफ गेज’ से माप कर श्रेणी तय
  • सभी जल स्रोतों की जियो-टैगिंग

इससे अधिकारियों को रियल-टाइम जानकारी मिलती है और जरूरत पड़ने पर तुरंत कार्रवाई की जाती है।

पानी की गुणवत्ता पर भी खास ध्यान

वन्यजीवों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए पानी की गुणवत्ता की नियमित जांच की जाती है।

  • pH स्तर और TDS (Total Dissolved Solids) का परीक्षण
  • जरूरत पड़ने पर टैंकर से जल आपूर्ति

इससे यह सुनिश्चित किया जाता है कि जानवरों को सुरक्षित और स्वच्छ पानी मिले।

‘साल्ट लिक’ से मिल रहे जरूरी मिनरल्स

सिर्फ पानी ही नहीं, बल्कि जानवरों के पोषण का भी ध्यान रखा जा रहा है। जल स्रोतों के पास ‘साल्ट लिक’ बनाए गए हैं, जिससे वन्यजीवों को जरूरी खनिज (Minerals) मिलते हैं। यह गर्मी के दौरान होने वाले तनाव को कम करने में मदद करता है।

देश के लिए बना मॉडल

वन विभाग के अनुसार, यह पहल केवल तात्कालिक राहत नहीं, बल्कि एक दीर्घकालिक समाधान है। लगातार निगरानी और वैज्ञानिक डेटा के उपयोग से यह मॉडल पूरे देश के लिए एक उदाहरण बन सकता है।

बारनवापारा अभयारण्य में अपनाई गई यह रणनीति दिखाती है कि सही योजना और तकनीक के इस्तेमाल से वन्यजीवों को कठिन परिस्थितियों में भी सुरक्षित रखा जा सकता है। यह पहल न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणादायक मॉडल बनकर सामने आई है।