Delhi News: दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने राजधानी में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। उन्होंने 6 नए निरंतर वायु गुणवत्ता निगरानी स्टेशन (CAAQMS) का उद्घाटन किया और राजधानी में 100 ‘वायु रक्षक’ वाहनों को रवाना किया ताकि प्रदूषण पर साल भर (365 दिन) लगातार निगरानी और कार्रवाई हो सके। इस पहल का उद्देश्य दिल्ली-एनसीआर में हवा की गुणवत्ता को सुधारना और प्रदूषण के स्रोत को नियंत्रित करना है।
प्रदूषण को 365 दिन का मुद्दा बताया
सीएम रेखा गुप्ता ने कहा कि वायु प्रदूषण सिर्फ सर्दियों तक सीमित समस्या नहीं है, बल्कि यह साल भर सक्रिय रहने वाली चुनौती है। इसलिए अब प्रदूषण नियंत्रण के लिए निरंतर निगरानी, डेटा आधारित नीतियाँ और कड़े नियम लागू किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि प्रत्येक 25 किमी² क्षेत्र में कम से कम एक एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशन होना चाहिए ताकि सभी हिस्सों में वास्तविक और विस्तृत डेटा मिल सके।
6 नए वायु गुणवत्ता मॉनिटरिंग स्टेशन
नई निगरानी स्टेशन राजधानी के विभिन्न हिस्सों पर स्थापित किए गए हैं:
• जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU)
• इग्नू (IGNOU)
• नेटाजी सुभाष यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी (Dwarka West Campus)
• CWD अक्षरधाम
• सरवोदय बाल विद्यालय (दिल्ली कैंट)
• डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी तैराकी परिसर, टॉकाटोरा गार्डन
इन नए स्टेशन से वायु गुणवत्ता की वास्तविक स्थिति का विस्तृत और तेज डेटा प्राप्त होगा, जिससे नीतियों को और प्रभावी बनाया जा सकेगा।
‘वायु रक्षक’ फ्लीट की भूमिका
‘वायु रक्षक’ नामक 100 विशेष वाहनों को भी लॉन्च किया गया है, जो दिल्ली के विभिन्न इलाकों में घूमकर हवा की गुणवत्ता की जाँच करेंगे और नियमों के उल्लंघन पर संबंधित एजेंसियों को सूचित करेंगे। इससे प्रदूषण के खिलाफ निगरानी और नियमों का पालन सख्ती से लागू करने में मदद मिलेगी।
पॉलीसी, तकनीक और सड़क से जुड़े कदम
सीएम ने यह भी कहा कि प्रदूषण नियंत्रण में सरकार पर्यावरण-हितैषी उपायों, सड़क और कचरा प्रबंधन, ग्रीन कवरेज बढ़ाने जैसे कदमों पर लगातार काम कर रही है। हवा की गुणवत्ता पर नजर रखने के लिए इस विस्तारित नेटवर्क की मदद से ट्रैफिक, औद्योगिक और घरेलू प्रदूषण स्रोतों का विश्लेषण कर कड़े कदम उठाए जाएंगे।
स्वच्छ हवा हर नागरिक का हक
रेखा गुप्ता ने स्पष्ट किया कि स्वच्छ हवा हर नागरिक का मौलिक अधिकार है और सरकार इसे गंभीरता से लागू करने के लिए निरंतर नजर रखेगी। उन्होंने कहा कि पेट्रोल-डीजल उत्सर्जन, औद्योगिक धुएँ, सड़क धूल और कचरा प्रबंधन जैसे मुद्दों को भी नियंत्रण में लेकर वायु गुणवत्ता में सुधार किया जाएगा।
क्यों यह कदम महत्वपूर्ण है
दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण का स्तर कई बार खतरनाक श्रेणी (AQI 300+) पर पहुँचता रहा है और सांस संबंधी स्वास्थ्य समस्याएँ बढ़ी हैं। इसलिए निरंतर निगरानी और तकनीकी उपकरणों के साथ शासन-स्तर पर सक्रिय नीतियाँ आवश्यक हैं ताकि प्रदूषण-उन्मूलन का लक्ष्य सफल हो सके।
