Chhattisgarh News: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन विश्व के एक बड़े आर्थिक मंच वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (World Economic Forum) की वार्षिक बैठक में भाग लेने के लिए स्विट्ज़रलैंड के ज्यूरिख पहुंच गए हैं।
यह बैठक दावोस (Davos) में आयोजित होगी, जहां दुनिया भर के नेता, निवेशक और नीति-निर्माता शामिल होंगे। मुख्यमंत्री के इस दौरे का मुख्य उद्देश्य झारखंड को वैश्विक निवेश और विकास की संभावनाओं से जोड़ना है।
ज्यूरिख में भव्य स्वागत और प्रतिनिधिमंडल
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का ज्यूरिख एयरपोर्ट पर भारत के राजदूत मृदुल कुमार ने गर्मजोशी से स्वागत किया। उनके साथ झारखंड सरकार का आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल भी मौजूद है, जो एक दिन बाद दावोस की ओर रवाना होगा।
सोरेन ने सोशल मीडिया पर लिखा कि वह इस वैश्विक मंच पर झारखंड और भारत का प्रतिनिधित्व करने को लेकर उत्साहित हैं।
मुख्य लक्ष्य: निवेश और रोजगार के अवसर
झारखंड सरकार की कोशिश है कि इस मंच के जरिए राज्य को “Infinite Opportunity State” यानी निवेश के लिए अत्यधिक संभावनाओं वाला राज्य के रूप में पेश किया जाए।
मुख्यमंत्री सोरेन विभिन्न वैश्विक उद्योग जगत के प्रतिनिधियों, बहुराष्ट्रीय कंपनियों और निवेशकों से मिलेंगे।
इस दौरान ब्रिटेन और ऑक्सफोर्ड जैसे देशों और संस्थानों का दौरा भी किया जाएगा, जिसमें निवेश, नीतियों और शिक्षा-स्किल विकास पर चर्चा होगी।
किस-किस क्षेत्र पर होगा विमर्श?
सोरेन और उनका प्रतिनिधिमंडल दावोस में निवेशकों से इन क्षेत्रों में संभावनाओं और अवसरों पर चर्चा करेंगे—
- खनिज आधारित उद्योग और खनन संबंधी निवेश
- ऊर्जा संक्रमण और स्वच्छ ऊर्जा समाधान
- औद्योगिक ढांचा और उत्पादन क्षमता
- पर्यटन और संस्कृति-आधारित निवेश
- सामाजिक समावेशन और सतत विकास
इन सभी विषयों पर विचार-विमर्श और प्रस्तावों पर चर्चा होगी, जिससे राज्य के विकास और रोजगार के नए अवसर बन सकें।
दावोस के बाद ब्रिटेन का दौरा
दावोस के कार्यक्रम के बाद मुख्यमंत्री और उनका प्रतिनिधिमंडल लंदन और ऑक्सफोर्ड (UK) भी जाएंगे।
यह दौरा निवेशकों, नीति-निर्माताओं और शिक्षा संस्थानों के साथ विचार-विमर्श का अवसर देगा।
ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में मुख्यमंत्री विशेष व्याख्यान भी देंगे, जो किसी भारतीय मुख्यमंत्री के लिए एक मानक बात है।
झारखंड का वैश्विक मंच-पर पहला प्रभाव
यह झारखंड के लिए पहला मौका है जब राज्य की संगठित और प्रभावी उपस्थिति को विश्व आर्थिक मंच पर दर्ज कराया जा रहा है।
सरकार का मानना है कि यह दौरा न सिर्फ निवेश आकर्षित करेगा, बल्कि औद्योगिक गतिविधियों, रोजगार और आर्थिक विकास को भी नई दिशा देगा।
