मुख्यमंत्री द्वारा प्रदेश में 2000 करोड़ रुपये की लागत से ‘शिक्षा क्रांति’ की शुरुआत
राज्य में शिक्षा क्षेत्र को नई ऊर्जा देने के उद्देश्य से उठाया गया ऐतिहासिक कदम
मनीष सिसोदिया ने पंजाब के शिक्षा क्षेत्र में व्यापक बदलाव लाने के लिए मुख्यमंत्री की सराहना की
Punjab News: प्रदेश में ‘शिक्षा क्रांति’ के नए युग की शुरुआत करते हुए पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज राज्य में ‘शिक्षा क्रांति’ के तहत 2000 करोड़ रुपये की लागत से शिक्षा क्षेत्र को बड़ा प्रोत्साहन दिया। यहाँ अति-आधुनिक ‘स्कूल ऑफ एमिनेंस’ के नए ब्लॉक को जनता को समर्पित करने के बाद जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब सरकार राज्य की स्वास्थ्य और शिक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए ठोस प्रयास कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा, “अब तक अपने बच्चे को सरकारी स्कूल में भेजना आम आदमी की मजबूरी होती थी, लेकिन अब शिक्षा प्रणाली को नया रूप देने से माता-पिता चाहेंगे कि उनका बच्चा सरकारी स्कूल में ही पढ़ाई करे।” भगवंत सिंह मान ने बताया कि छात्रों को गुणवत्ता युक्त शिक्षा देने के लिए पूरे राज्य में ‘स्कूल ऑफ एमिनेंस’ की स्थापना की गई है।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार समाज के हर वर्ग, खासकर युवाओं की भलाई के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है और इसके लिए कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार छात्रों को विभिन्न प्रतियोगिताओं के लिए तैयार करने हेतु हर संभव प्रयास कर रही है और अब छात्र शिक्षा के क्षेत्र में शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनका ध्यान राज्य के सर्वांगीण विकास और जनता की खुशहाली को सुनिश्चित करने पर केंद्रित है। उन्होंने पूर्ववर्ती सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि पिछली सरकारों ने कभी भी छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने की परवाह नहीं की। उन्होंने कहा कि बड़े नेताओं के बेटे-बेटियाँ कॉन्वेंट स्कूलों में पढ़ते थे, इसलिए उन्होंने कभी सरकारी स्कूलों की स्थिति सुधारने की ज़रूरत नहीं समझी। उन्होंने कहा कि उस समय सरकारी स्कूल सिर्फ ‘मिड-डे मील सेंटर’ बनकर रह गए थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन्होंने छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से वंचित रखा और गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी की, उन्हें उनके पापों की सजा मिल रही है। उन्होंने कहा कि लोगों ने ऐसे नेताओं को पहले ही सत्ता से बाहर कर दिया है और अब वे राजनीतिक गुमनामी में हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब की जनता इन दोषियों को उनके पापों के लिए कभी माफ नहीं करेगी और उन्हें सबक सिखाएगी।
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार शिक्षकों को विदेशों और प्रतिष्ठित राष्ट्रीय संस्थानों में भेज रही है ताकि उनके शिक्षण कौशल को और निखारा जा सके। उन्होंने बताया कि अच्छी तरह से प्रशिक्षित स्टाफ ने सरकारी स्कूलों में दाखिलों की दर बढ़ाने में मदद की है। उन्होंने कहा कि पंजाब देश भर में शिक्षा क्रांति का उदाहरण बन रहा है क्योंकि राज्य सरकार ने इस पर विशेष बल दिया है। उन्होंने कहा कि अब शिक्षक और प्रिंसिपल केवल पढ़ाई पर ध्यान दे रहे हैं क्योंकि बाकी स्कूल संबंधी कार्यों के लिए सरकार ने आवश्यक स्टाफ नियुक्त कर दिया है।
मुख्यमंत्री ने गर्व से बताया कि राज्य के युवाओं को अब तक 54,000 से अधिक नौकरियाँ दी जा चुकी हैं। ये सभी नौकरियाँ पूरी योग्यता के आधार पर, बिना किसी भ्रष्टाचार या सिफारिश के दी गई हैं। उन्होंने कहा कि इससे युवा पंजाब के सामाजिक-आर्थिक विकास में सक्रिय भागीदार बन रहे हैं।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने नशे के खिलाफ ‘युद्ध नशों के विरुद्ध’ मुहिम शुरू की है और युवाओं की असीम ऊर्जा को सकारात्मक दिशा में मोड़ा जा रहा है। उन्होंने कहा कि पंजाब पहले ही इस बुराई के कारण भारी मानव संसाधन का नुकसान झेल चुका है, इसलिए आने वाली पीढ़ियों को इससे बचाना बहुत जरूरी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आम जनता के सक्रिय सहयोग से यह मुहिम शुरू की गई है ताकि राज्य से नशे की बुराई का सफाया किया जा सके। उन्होंने कहा कि सरकार यह किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगी कि नशे से पीड़ित परिवार तबाह हों और नशा तस्कर ऐश कर रहे हों।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार पहले ही नशे की सप्लाई चेन को तोड़ चुकी है और इसमें शामिल बड़ी मछलियों को जेल भेजा गया है। उन्होंने बताया कि पहली बार राज्य सरकार द्वारा नशा तस्करों की गैर-कानूनी संपत्तियों को जब्त और नष्ट किया जा रहा है ताकि कोई और इस गंदे धंधे में न फंसे।
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ‘स्कूल मेंटरशिप प्रोग्राम’ लागू कर रही है, जिसके तहत आईएएस/आईपीएस अधिकारी राज्य के ग्रामीण स्कूलों को गोद लेंगे और छात्रों को जीवन में सफलता प्राप्त करने का मार्गदर्शन देंगे।
उन्होंने कहा कि यह पायलट प्रोजेक्ट राज्य के 80 ‘स्कूल ऑफ एमिनेंस’ में शुरू किया जाएगा और हर अधिकारी को पांच साल के लिए एक स्कूल अलॉट किया जाएगा, चाहे उसकी पोस्टिंग कहीं भी हो।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कदम अधिकारियों और छात्रों-शिक्षकों के बीच संवाद को बढ़ाकर शिक्षा के माहौल को और मजबूत करेगा। अधिकारी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए छात्रों को तैयार करेंगे और शिक्षकों को उनके कौशल को अपग्रेड करने में मदद करेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ये अधिकारी स्कूलों के विकास के लिए संसाधन जुटाएंगे और ‘रिसोर्स पर्सन’ की तरह काम करेंगे। उन्होंने कहा कि ये अधिकारी बॉस की तरह नहीं, बल्कि मार्गदर्शक की भूमिका निभाएंगे और यह सेवा स्वेच्छा से होगी। इच्छुक अधिकारियों को इसे अपनी नियमित ड्यूटी के साथ निभाना होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कदम राज्य के शिक्षा क्षेत्र में और क्रांति लाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह संतोषजनक बात है कि इन स्कूलों में बहुत ही प्रतिभाशाली छात्र पढ़ रहे हैं। उन्होंने बताया कि पंजाब सरकार ने कुल बजट का 11 प्रतिशत यानी 18,047 करोड़ रुपये शिक्षा क्षेत्र के लिए आवंटित किए हैं, जो कि एक बड़ा प्रोत्साहन है। इससे एक नया, खुशहाल और प्रगतिशील पंजाब बनाने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि सरकार ने छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के लिए शिक्षा क्षेत्र के विकास पर पूरा ध्यान केंद्रित किया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब सरकार राज्य के सभी सरकारी स्कूलों में पेरेंट्स-टीचर्स मीटिंग (PTM) करवा रही है। उन्होंने कहा कि लाखों माता-पिता अपने बच्चों को दी जा रही पढ़ाई, माहौल, पाठ्यक्रम और अन्य चीजों के बारे में जानकारी ले रहे हैं। यह शिक्षकों को भी छात्रों की प्रगति के बारे में समझाने का मौका देगा।
इस दौरान दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि राज्य सरकार छात्रों को उनके सपने साकार करने में मदद करने के लिए दिन-रात मेहनत कर रही है। उन्होंने कहा कि राज्य में शिक्षा क्षेत्र का पूरी तरह कायाकल्प किया जा रहा है।
मनीष सिसोदिया ने कहा कि हमने वादा किया था कि हम लोगों को धार्मिक आधार पर बांटने वाली राजनीति नहीं करेंगे, बल्कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के माध्यम से युवाओं को योग्य और समर्थ बनाएंगे।
उन्होंने कहा कि बीते तीन वर्षों में राज्य के 12,000 से अधिक स्कूलों की दिशा और दशा पूरी तरह बदल चुकी है। पहले सरकारी स्कूलों की हालत बदतर थी, लेकिन अब पूरे राज्य में 29 लाख से अधिक छात्रों को बेहतरीन सुविधाएँ मिल रही हैं।

पूर्व उपमुख्यमंत्री ने कहा कि इन स्कूलों में बहुत योग्य और होनहार शिक्षक हैं। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार नशे के खात्मे के लिए दो-स्तरीय रणनीति लागू कर रही है—एक ओर नशा तस्करों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है, तो दूसरी ओर युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दी जा रही है ताकि पढ़े-लिखे युवाओं के बीच नशे की मांग ही समाप्त हो जाए।
मनीष सिसोदिया ने कहा कि इन प्रयासों से पंजाब जल्द ही नशामुक्त राज्य के रूप में उभरेगा। उन्होंने यह भी कहा कि पंजाब में हर बच्चे को गुणवत्ता वाली शिक्षा दी जा रही है, जबकि दिल्ली में नई सरकार गरीब बच्चों को अच्छी शिक्षा से वंचित कर रही है।
उन्होंने कहा कि दिल्ली के निजी स्कूलों की फीस दोगुनी कर दी गई है, जो आम लोगों, विशेषकर कमजोर वर्गों के शोषण के समान है। मनीष सिसोदिया ने कहा कि पंजाब गरीबों और कमजोर वर्गों का संरक्षक बनकर उभर रहा है।
इस मौके पर सांसद मालविंदर सिंह कांग, विधायक डॉ. सुखविंदर कुमार सुख्खी, नछत्तर पाल, शिक्षा सचिव अनिंदिता मित्रा और अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे।
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