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Punjab: जी.एस.टी. दर तार्किकता पर पंजाब वित्त मंत्री की चेतावनी – राज्यों की वित्तीय स्थिरता के लिए मुआवज़ा ज़रूरी

पंजाब राजनीति
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Punjab News: पंजाब के वित्त मंत्री एडवोकेट हरपाल सिंह चीमा ने केंद्र सरकार से अपील की है कि जी.एस.टी. दर तार्किकता के मौजूदा प्रस्ताव के तहत राज्यों की वित्तीय स्थिरता को खतरे में न डाला जाए। उन्होंने कहा कि यदि यह प्रस्ताव बिना उचित मुआवज़े के लागू किया जाता है तो इससे राज्यों की आमदनी में घाटा होगा, जो संघीय ढांचे को कमज़ोर करेगा।

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उन्होंने स्पष्ट किया कि कीमतों की तार्किकता का लाभ देश के ग़रीब लोगों तक पहुँचना चाहिए, न कि कॉर्पोरेट घरानों तक। कर्नाटक भवन में हुई राज्यों के वित्त मंत्रियों और प्रतिनिधियों की बैठक के दौरान चीमा ने सुझाव दिया कि राज्यों के हितों की रक्षा के लिए कम से कम पाँच सालों तक मुआवज़े की व्यवस्था होनी चाहिए और लग्ज़री सामानों पर अतिरिक्त लेवी लगाकर राज्यों को अधिक आय दी जानी चाहिए। यदि पाँच सालों के बाद भी घाटा बना रहता है तो इस प्रावधान को और समय तक बढ़ाया जाना चाहिए।

चीमा ने बताया कि जी.एस.टी. लागू होने के बाद पंजाब को लगभग 1.11 लाख करोड़ रुपये का भारी वित्तीय नुकसान हुआ है, जबकि केंद्र ने केवल 60 हज़ार करोड़ रुपये का ही मुआवज़ा दिया है। इस कारण शेष घाटे की भरपाई अभी तक नहीं हो सकी। उन्होंने ज़ोर दिया कि राज्यों के आर्थिक हितों को सुरक्षित किए बिना लोक-कल्याणकारी कार्य करना असंभव है।

मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि राज्यों द्वारा लग्ज़री और “सिन गुड्स” पर अतिरिक्त कर लगाने की माँग की गई है ताकि आय के घाटे की भरपाई की जा सके। चीमा ने कहा कि केंद्र को यह समझना चाहिए कि राज्यों के मज़बूत होने से ही देश मज़बूत बनेगा।

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बाढ़ की स्थिति पर पूछे गए सवाल के जवाब में चीमा ने कहा कि केंद्र सरकार को राज्य की सहायता के लिए आगे आना चाहिए। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार बाढ़ प्रभावित लोगों के साथ खड़ी है और जैसे ही नुक़सान की पूरी रिपोर्ट आएगी, केंद्र से विशेष पैकेज की माँग की जाएगी।