Noida के सेक्टर-94 में एक दर्दनाक हादसे में 23 वर्षीय छात्र हर्षित की पानी से भरे निर्माण स्थल के गड्ढे में डूबने से मौत हो गई। हर्षित अपने दोस्तों के साथ परीक्षा खत्म होने के बाद जश्न मनाने गया था, लेकिन कुछ ही समय में यह खुशी मातम में बदल गई।
बताया जा रहा है कि चार दोस्त एक खाली प्लॉट पर पहुंचे थे, जहां बारिश का पानी जमा होकर गहरा गड्ढा बन गया था। इसी दौरान हर्षित पानी में उतर गया और फिर बाहर नहीं निकल पाया।
80 फीट गहरा गड्ढा और सुरक्षा के इंतजाम नहीं
घटना स्थल पर मौजूद गड्ढा बेहद गहरा था और वहां किसी तरह की सुरक्षा व्यवस्था नहीं थी। परिजनों और स्थानीय लोगों ने प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि यदि उचित सुरक्षा इंतजाम होते, तो यह हादसा टाला जा सकता था।
इस निर्माण स्थल पर पानी लंबे समय से जमा था और आसपास पर्याप्त बैरिकेडिंग या चेतावनी बोर्ड नहीं लगाए गए थे, जिससे लोगों के लिए खतरा बना हुआ था।
तैराक होने के बावजूद कैसे डूबा? उठ रहे सवाल
परिजनों का दावा है कि हर्षित एक अच्छा तैराक था, इसलिए यह सवाल उठ रहा है कि आखिर वह डूबा कैसे। पुलिस इस मामले में कॉल रिकॉर्ड और घटनाक्रम की टाइमलाइन की जांच कर रही है।
कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, वह पहले उथले पानी में था, लेकिन बाद में गहरे हिस्से में चला गया, जहां उसका पैर झाड़ियों और लोहे की ग्रिल में फंस गया। इससे वह बाहर नहीं निकल सका।
हत्या की आशंका से भी इनकार नहीं
पुलिस ने इस मामले में सभी एंगल से जांच शुरू कर दी है और हत्या की संभावना को भी पूरी तरह से खारिज नहीं किया गया है। फिलहाल पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य सबूतों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
अधिकारियों का कहना है कि घटना की सही वजह जानने के लिए विस्तृत जांच जारी है और जिम्मेदारी तय होने के बाद कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
नोएडा सेक्टर-94 में छात्र हर्षित की मौत ने निर्माण स्थलों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह मामला सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि शहरी क्षेत्रों में लापरवाही और असुरक्षित निर्माण स्थलों के खतरों को भी उजागर करता है। जांच के नतीजों से ही स्पष्ट होगा कि यह दुर्घटना थी या किसी की बड़ी लापरवाही।
