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MP News: सीएम मोहन यादव बोले- हथियारों के बल पर डराने वालों को मिला करारा जवाब, नक्सलवाद के खिलाफ कही बड़ी बात

मध्यप्रदेश
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MP News: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव इंदौर के पास बुढ़ानिया में आयोजित ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के कार्यक्रम में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने पौधारोपण किया और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने नक्सलवाद, लोकतंत्र, जल संरक्षण और पर्यावरण जैसे मुद्दों पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि देश में हथियारों के बल पर लोगों को डराने वालों को करारा जवाब मिला है और लोकतांत्रिक व्यवस्था में हिंसा के लिए कोई जगह नहीं है।

‘लाल सलाम को आखिरी सलाम में बदला’

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि सुरक्षा बलों ने नक्सलवाद के खिलाफ मजबूती से कार्रवाई की है।

उन्होंने कहा कि बीएसएफ ने ‘लाल सलाम’ को ‘आखिरी सलाम’ में बदलने का काम किया है। आज के लोकतांत्रिक भारत में कोई भी व्यक्ति या संगठन हथियारों के बल पर लोगों को डरा नहीं सकता।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हिंसा का रास्ता अपनाने वालों को लोकतांत्रिक व्यवस्था पर विश्वास करना होगा। हथियारों के जरिए लोगों में डर पैदा करने वालों को जवाब मिल चुका है।

नक्सलवाद के खिलाफ सरकार की कार्रवाई का किया जिक्र

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में नक्सलवाद के खिलाफ की जा रही कार्रवाई का भी जिक्र किया।

उन्होंने कहा कि देश में नक्सलवाद को समाप्त करने की दिशा में बड़ी सफलता मिली है। सुरक्षा बलों ने हिंसा के रास्ते पर चलने वाले लोगों और संगठनों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र में समस्याओं का समाधान बातचीत और संवैधानिक व्यवस्था के माध्यम से होना चाहिए, न कि हथियारों और हिंसा के जरिए।

देवी अहिल्याबाई के कार्यों को किया याद

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इंदौर के इतिहास और देवी अहिल्याबाई होलकर के योगदान का भी जिक्र किया।

उन्होंने कहा कि इंदौर अपने गौरवशाली इतिहास के लिए जाना जाता है। देवी अहिल्याबाई होलकर ने अपने शासनकाल में कई स्थानों पर बावड़ियों और घाटों का निर्माण कराया था।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान सरकार भी जल संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों को बचाने के लिए लगातार काम कर रही है।

तालाबों और बावड़ियों को संवारने का काम जारी

मुख्यमंत्री ने बताया कि मध्य प्रदेश सरकार ने जल संरक्षण के लिए पुराने तालाबों और बावड़ियों को सुधारने और संवारने का काम किया है।

प्रदेश में तीन महीने तक जल संरक्षण अभियान चलाया गया, जिसके माध्यम से जल स्रोतों को बचाने और लोगों को जल संरक्षण के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया गया।

उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों के लिए पानी और पर्यावरण को सुरक्षित रखना सभी की जिम्मेदारी है।

इंदौर के पहाड़ों को हरा-भरा बनाने की तैयारी

मुख्यमंत्री ने कहा कि इंदौर अब अपने आसपास के पहाड़ी क्षेत्रों को हरा-भरा बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

बड़े स्तर पर पौधारोपण अभियान चलाकर खाली और पथरीली जमीन पर पेड़ लगाए जा रहे हैं।

सरकार का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण के साथ हरियाली बढ़ाना और जलवायु परिवर्तन से पैदा होने वाली चुनौतियों का सामना करना है।

‘मध्य प्रदेश नदियों का मायका’

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मध्य प्रदेश को ‘नदियों का मायका’ बताते हुए कहा कि प्रदेश को प्रकृति का विशेष आशीर्वाद मिला है।

उन्होंने कहा कि मालवा क्षेत्र से गंभीर, चंबल और शिप्रा जैसी महत्वपूर्ण नदियां निकलती हैं और आगे चलकर गंगा नदी के बेसिन से जुड़ती हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इन नदियों और प्राकृतिक जल स्रोतों का संरक्षण करना सभी लोगों की जिम्मेदारी है।

जलवायु परिवर्तन से बचाव में पेड़ों की बड़ी भूमिका

मुख्यमंत्री ने पर्यावरण से जुड़ी चुनौतियों का जिक्र करते हुए कहा कि बदलते मौसम और प्राकृतिक खतरों से निपटने के लिए पेड़ों की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है।

उन्होंने कहा कि पेड़ ऋषि-मुनियों की तरह एक ही स्थान पर खड़े रहकर लोगों को फल, छाया और स्वच्छ हवा देते हैं।

इसलिए अधिक से अधिक पौधे लगाने के साथ उनकी देखभाल करना भी जरूरी है।

इंदौर में बड़े स्तर पर चल रहा पौधारोपण अभियान

कार्यक्रम में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि मध्य प्रदेश की आर्थिक दिशा तय करने में इंदौर की महत्वपूर्ण भूमिका रही है और अब पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में भी इंदौर उदाहरण बन रहा है।

उन्होंने बताया कि पहले इंदौर में 12 लाख पौधे लगाकर विश्व रिकॉर्ड बनाया गया था और अब 17 लाख पेड़ लगाने का अभियान चलाया जा रहा है।

पथरीली जमीन पर लगाए जा रहे बड़े पेड़

मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि पिछले अभियान के दौरान इंदौर में करीब साढ़े 15 लाख पेड़ लगाए गए थे।

इस बार करीब साढ़े 22 लाख पेड़ लगाने का लक्ष्य रखा गया है।

उन्होंने कहा कि शहर में पौधारोपण के लिए जगह कम होने के कारण अब पथरीली जमीन और अन्य क्षेत्रों में बड़े पेड़ लगाए जा रहे हैं।

‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के माध्यम से इंदौर को अधिक हरा-भरा बनाने और पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों की भागीदारी बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।