Haryana News: चंडीगढ़/हरियाणा। हरियाणा के मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री नायब सिंह सैनी सोमवार को विधानसभा में राज्य का 2026-27 वित्तीय वर्ष का बजट पेश करेंगे। यह उनका दूसरा बजट होगा और इसे लोगों की आकांक्षाओं, आम सुझावों और विकास की आधारशिला बताया जा रहा है।
पिछले बजट से आगे बढ़ने की तैयारी
सैनी ने अपने पहले बजट को “जनता का बजट” बताया था, जिसमें जनता के सुझावों को शामिल कर विकास की रणनीति बनाई गई थी। इस बार भी उन्होंने लोगों, उद्योग, प्रशासन और विशेषज्ञों के साथ लगभग 12 बैठकों में सुझाव लिए हैं और एआई चैटबॉट से 1.2 लाख से अधिक सुझाव प्राप्त किए हैं। बजट में पहले से कई गुणा ज्यादा सुझाव शामिल करने का लक्ष्य है।
बजट का आकार और प्रमुख फोकस क्षेत्र
बताया जा रहा है कि 2026-27 के लिए बजट का अनुमान लगभग ₹2.15-2.30 लाख करोड़ के बीच हो सकता है, जिसमें इंफ्रास्ट्रक्चर, शिक्षा, कृषि, ऊर्जा, तकनीक और ग्रामीण विकास जैसे प्रमुख क्षेत्रों पर जोर दिया जाएगा।
जनकल्याण और विकास योजनाओं की उम्मीद
राज्य के राजनीतिक सचिव ने कहा है कि इस बजट में जनकल्याण, सुशासन और भविष्य की योजनाओं को एक मजबूत आधार देने का प्रयास होगा। इसमें नागरिकों की दैनिक आवश्यकताओं, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर, रोजगार सृजन, गरीबों तथा मध्यम वर्ग के लोगों के लिए सहायताएँ शामिल होने की उम्मीद है।
बजट सत्र में बहस और विपक्ष की भूमिका
बजट सत्र के दौरान विधानसभा में वित्तीय मुद्दों पर बहस देखने को मिली है। विपक्ष ने कुछ मामलों पर सवाल उठाए हैं, जैसे कि अनाज खरीद प्रक्रिया पर आरोप और अन्य मुद्दों पर भी चर्चा हो रही है। मुख्यमंत्री ने जवाब में सरकार की नीतियों और सुधारों की व्याख्या की है।
वित्तीय अनुशासन और भविष्य की योजना
कई विशेषज्ञों का मानना है कि इस बजट में वित्तीय अनुशासन और स्थिर विकास की दिशा को ध्यान में रखते हुए योजनाएँ तैयार की जाएंगी। भारी कर्ज, सीमित संसाधन और विकास की चुनौतियों को संतुलित करना इस बजट की कुंजी मानी जा रही है।
लोगों की उम्मीदें
हरियाणा के आम लोग, किसान, युवा और व्यवसायी इस बजट से उम्मीद रखते हैं कि यह उनके दैनिक जीवन, रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में स्पष्ट सुधार और राहत लाएगा।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का यह बजट राज्य के विकास और नागरिकों की भलाई के लिए एक महत्वपूर्ण दस्तावेज़ माना जा रहा है, और पूरे प्रदेश की निगाहें सोमवार की बजट पेशी पर टिकी हैं।
