Haryana News: हरियाणा में 111 गांवों को ‘स्मार्ट गली’ का तोहफा, सीएम सैनी के विजन का हिस्सा

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Haryana News: चंडीगढ़। हरियाणा सरकार ग्रामीण विकास को और मजबूती देने के लिए स्मार्ट गली परियोजना शुरू कर रही है। इसके तहत 111 ऐसे गांवों को चुन लिया गया है, जिनकी आबादी 10,000 से अधिक है, ताकि वहां की मुख्य गलियों को आधुनिक और साफ-सुथरा रूप दिया जा सके। यह पहल हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के गांवों के विकास के विजन का एक अहम हिस्सा है।

क्या है ‘स्मार्ट गली’ योजना?

इस योजना के तहत हर चयनित गांव की एक मुख्य गली को आधुनिक सुविधाओं के साथ विकसित किया जाएगा। इन स्मार्ट गलियों में शामिल किए जाएंगे:

  • उन्नत स्ट्रीट लाइटें
  • फुटपाथ (पैदल चलने के रास्ते)
  • हरियाली के लिए पौधे
  • आकर्षक और मजबूत पेवर ब्लॉक
  • बेहतर नाली और सीवरेज व्यवस्था

इन सुविधाओं का लक्ष्य है कि गांव की गलियां साफ-सुंदर, सुरक्षित और देखने में आकर्षक बनें, जिससे ग्रामीण जीवन की गुणवत्ता बढ़े।

किस तरह चुने जा रहे हैं गांव?

हरियाणा के पंचायती राज विभाग ने वह प्रक्रिया शुरू कर दी है जिसमें उन गलियों की पहचान की जा रही है, जहां सबसे ज्यादा लोगों का आना-जाना होता है। अधिकारी यह भी देख रहे हैं कि गलियों की चौड़ाई आधुनिक डिजाइन से मेल खाती हो। सामूहिक निर्णय के बाद ही गलियों का विकास शुरू किया जाएगा।

कहां और कितनी स्मार्ट गलियाँ?

राज्य के कई जिलों में स्मार्ट गलियों की संख्या अलग-अलग होगी। कैथल जिले में सबसे अधिक 13 गांव, हिसार में 12 गांव शामिल हैं, जबकि नूंह, पलवल, करनाल, भिवानी और जींद जैसे जिलों में भी बड़ी संख्या में गांवों को इस योजना में स्थान दिया गया है।

क्या मिलेगा गांवों को फायदा?

इस योजना से गांवों को केवल सौंदर्य ही नहीं, बल्कि जीवन की गुणवत्ता और सुविधाओं में सुधार भी मिलेगा। उदाहरण के लिए:

  • ग्रामीणों के लिए बेहतर आवागमन और सुरक्षित सड़कें
  • पैदल चलने वालों के लिए सुरक्षित फुटपाथ
  • बारिश में पानी घुसने की समस्या में कमी
  • रात में बेहतर सड़क रोशनी जिससे सुरक्षा बढ़े

इन बदलावों से गांवों की आत्म-पहचान और जीवन शैली दोनों को नया रूप मिलने की उम्मीद है।

सीएम सैनी का विजन और ग्रामीण विकास

सीएम सैनी का मानना है कि सिर्फ शहरों को आधुनिक बनाना ही काफी नहीं है, बल्कि गांवों को भी ऐसा रूप देने की आवश्यकता है ताकि ग्रामीणों को समान सुविधाएं मिले और वे शहरी सुविधाओं से पीछे न रहें। यह योजना ग्रामीण समाज के इन्फ्रास्ट्रक्चर और जीवन स्तर को सशक्त बनाने की दिशा में एक सकारात्मक कदम के रूप में देखी जा रही है।