Chhattisgarh News: रायपुर साहित्य उत्सव में सिनेमा और साहित्य के रिश्ते पर संवाद

छत्तीसगढ़
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Chhatisgarh News: रायपुर, 24 जनवरी 2026, रायपुर साहित्य उत्सव के तहत श्यामलाल चतुर्वेदी मंडप में “नई पीढ़ी की फिल्मी दुनिया” विषय पर एक विशेष परिचर्चा आयोजित की गई।

फिल्म और कला जगत की जानी-मानी हस्तियां रहीं मौजूद

इस परिचर्चा में अभिनेता सत्यजीत दुबे, अभिनेत्री टी. जे. भानु, विधायक एवं प्रसिद्ध कलाकार अनुज शर्मा और सुविज्ञा दुबे विशेष अतिथि के रूप में शामिल हुए।

छत्तीसगढ़ी भाषा सरल और प्रभावशाली

विधायक एवं कलाकार अनुज शर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ी भाषा बहुत सरल और सहज है। संवाद के माध्यम से इसे और अधिक लोगों तक पहुंचाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि आज का समय महिलाओं की सशक्त भूमिका का है और सिनेमा में उनका योगदान लगातार बढ़ रहा है।

सिनेमा, रंगमंच और टीवी की अलग-अलग भूमिकाएं

अनुज शर्मा ने बताया कि फिल्मों में निर्देशक की भूमिका सबसे अहम होती है, रंगमंच में अभिनेता का महत्व होता है और टीवी धारावाहिकों में लेखक की भूमिका निर्णायक होती है। उन्होंने कहा कि किसी लेखक की पहचान उसके पहनावे से नहीं, बल्कि उसकी रचनाओं से होती है।

अच्छी कहानी ही फिल्म को यादगार बनाती है

अभिनेता सत्यजीत दुबे ने कहा कि किसी भी फिल्म में भावनात्मक जुड़ाव होना जरूरी है, तभी वह लंबे समय तक दर्शकों के दिल में रहती है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ का साहित्य बहुत समृद्ध है और यहां बेहतरीन कहानियों की कोई कमी नहीं है।

लोक जीवन में छुपी हैं सिनेमा की कहानियां

सत्यजीत दुबे ने कहा कि छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति और जीवनशैली में कई कहानियां मौजूद हैं, जिन्हें सिनेमा के माध्यम से दुनिया के सामने लाया जा सकता है। इसके लिए लोगों को पढ़ने की आदत को बढ़ावा देना जरूरी है।

डिजिटल प्लेटफॉर्म से नए कलाकारों को मौका

अभिनेत्री टी. जे. भानु ने कहा कि यूट्यूब और अन्य डिजिटल माध्यमों ने नए कलाकारों के लिए कई अवसर खोले हैं। आज छोटी कहानियां भी बड़े दर्शक वर्ग तक पहुंच रही हैं।

यात्रा का आनंद पूरी प्रक्रिया में है

टी. जे. भानु ने कहा कि किसी भी रचनात्मक यात्रा का आनंद केवल मंजिल में नहीं, बल्कि पूरे सफर में होता है। उन्होंने यह भी कहा कि जब महिलाएं निर्माता की भूमिका निभाती हैं, तो वे पूरी टीम की जरूरतों और भावनाओं को समझती हैं।

बच्चों में आत्मविश्वास जरूरी

सुविज्ञा दुबे ने कहा कि बच्चों में आत्मविश्वास का विकास घर से ही शुरू होना चाहिए। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे बच्चों को अपनी बात रखने और रचनात्मक बनने के अवसर दें।

भविष्य के सिनेमा की दिशा

परिचर्चा के अंत में वक्ताओं ने कहा कि आने वाले समय में सिनेमा की दिशा मजबूत कहानी, भावनात्मक जुड़ाव और सामाजिक जिम्मेदारी तय करेगी।