Chhattisgarh News: चिंतन शिविर 3.0 से बनेगा विकसित छत्तीसगढ़ का रोडमैप, डिजिटल गवर्नेंस और AI पर होगा फोकस

छत्तीसगढ़
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Chhattisgarh News: छत्तीसगढ़ सरकार ने शासन-प्रशासन को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया है। राजधानी रायपुर स्थित भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) रायपुर में आयोजित दो दिवसीय ‘चिंतन शिविर 3.0’ का शुभारंभ मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की मौजूदगी में हुआ। इस शिविर का उद्देश्य विकसित छत्तीसगढ़ के लिए दूरदर्शी नीतियां तैयार करना, प्रशासनिक कार्यप्रणाली में नवाचार लाना और सुशासन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाना है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि चिंतन शिविर अब केवल चर्चा का मंच नहीं रहा, बल्कि यह शासन की कार्यसंस्कृति में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रभावी माध्यम बन चुका है। पिछले दो संस्करणों से मिले सुझावों के आधार पर कई महत्वपूर्ण सुधार लागू किए गए, जिनका लाभ आज प्रदेश की जनता को मिल रहा है।

AI, डिजिटल गवर्नेंस और नई तकनीकों पर हुआ मंथन

चिंतन शिविर 3.0 के पहले दिन शासन में उभरती तकनीकों के उपयोग पर विशेष चर्चा हुई। नीति आयोग के सदस्य प्रो. अभय करंदीकर ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, 5जी, ड्रोन, ब्लॉकचेन, जियोस्पेशियल टेक्नोलॉजी और डेटा आधारित प्रशासन जैसे विषयों पर विस्तार से अपने विचार रखे।

उन्होंने बताया कि आधुनिक तकनीकों के माध्यम से सरकारी सेवाओं को अधिक पारदर्शी, तेज और नागरिक-केंद्रित बनाया जा सकता है। साथ ही डिजिटल नवाचारों के जरिए रोजगार, निवेश और आर्थिक विकास के नए अवसर भी पैदा किए जा सकते हैं।

नेतृत्व विकास और जनसेवा पर विशेष जोर

शिविर में प्रसिद्ध आध्यात्मिक चिंतक गौर गोपाल दास ने नेतृत्व विकास, भावनात्मक संतुलन, नैतिक मूल्यों और जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारियों पर प्रेरक विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि प्रभावी सुशासन के लिए संवेदनशील प्रशासन और मूल्य आधारित नेतृत्व सबसे महत्वपूर्ण है। उनके सत्र में मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों ने भी सक्रिय भागीदारी की।

कृषि से समृद्धि की रणनीति पर विशेषज्ञों ने रखे सुझाव

‘कृषि से समृद्धि’ विषय पर आयोजित सत्र में कृषि अर्थशास्त्री डॉ. रमेश चंद और कृषि विशेषज्ञ टी. विजय कुमार ने प्राकृतिक खेती, जलवायु अनुकूल कृषि, फसल विविधीकरण, मूल्य संवर्धन, बाजार संपर्क और तकनीक आधारित कृषि सुधारों पर अपने अनुभव साझा किए।

विशेषज्ञों ने देश के विभिन्न राज्यों के सफल मॉडल प्रस्तुत करते हुए किसानों की आय बढ़ाने, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और कृषि को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए कई व्यावहारिक सुझाव दिए। इस दौरान मंत्रियों और अधिकारियों ने समूह चर्चा के माध्यम से इन विषयों पर विस्तृत मंथन भी किया।

पिछले चिंतन शिविरों से मिले कई बड़े परिणाम

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि पहले आयोजित चिंतन शिविरों के सुझावों को सरकार ने प्रभावी ढंग से लागू किया है। इन्हीं विचारों के आधार पर मंत्रालय में ई-ऑफिस प्रणाली लागू की गई, जिससे फाइलों के निपटारे की प्रक्रिया तेज और पारदर्शी बनी है।

इसी तरह मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 और सेवा सेतु जैसी महत्वपूर्ण पहल भी चिंतन शिविरों का परिणाम हैं। सेवा सेतु के माध्यम से वर्तमान में 36 विभागों की 520 से अधिक सरकारी सेवाएं ऑनलाइन उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे आम नागरिकों को घर बैठे तेज और पारदर्शी सेवाओं का लाभ मिल रहा है।

विकसित छत्तीसगढ़ 2047 की दिशा में अहम पहल

मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि चिंतन शिविर 3.0 से प्राप्त सुझाव आने वाले समय में तकनीक आधारित प्रशासन, कृषि सुधार, विभागीय समन्वय और जनसेवा के नए मानक स्थापित करेंगे। उन्होंने कहा कि ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए छत्तीसगढ़ सरकार नवाचार, ज्ञान और डिजिटल तकनीकों को लगातार बढ़ावा दे रही है। शिविर से निकले सुझावों को जल्द ही ठोस नीतियों और प्रशासनिक सुधारों के रूप में लागू किया जाएगा, जिससे प्रदेश में सुशासन और विकास की नई दिशा तय होगी।