Bihar News: बिहार विधानसभा ने बुधवार को अनुपूरक (Appropriation) बिल पारित किया, जिससे राज्य सरकार को 2025-26 वित्तीय वर्ष के लिए खजाने से ₹12,165 करोड़ से अधिक अतिरिक्त राशि निकालने की मंजूरी मिल गई। इस विधेयक को सदन में वॉइस वोट के जरिए स्वीकार किया गया, जबकि विपक्ष के कई सदस्य सवालों पर असंतुष्ट होकर वॉकआउट कर गए।
अनुपूरक बजट क्या है और क्यों जरूरी है
अनुपूरक बजट वह अतिरिक्त वित्तीय प्रावधान होता है जो मौजूदा बजट के अलावा खर्च के लिए मंजूर किया जाता है। बिहार के वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने विधानसभा में तीसरा अनुपूरक बजट पेश किया, जिसमें यह राशि खर्च करने के लिए सरकार को अनुमति मांगी गई थी। इससे सरकार को योजनाओं और विकास परियोजनाओं पर खर्च जारी रखने में मदद मिलेगी।
मुख्य योजनाओं को मिलेगा फंड
इस अनुपूरक खर्च में शिक्षा और पोषण कार्यक्रमों के लिए धन का प्रावधान किया गया है। उदाहरण के लिए:
• समग्र शिक्षा अभियान के लिए राशि शामिल है।
• प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के लिए केंद्र के हिस्से के रूप में धन दिया गया।
• सक्षम आंगनवाड़ी पोषण-2.0 जैसे पोषण समर्थन कार्यक्रम को भी राशि आवंटित की गई है।
• केंद्र-राज्य साझेदारी वाले राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) को भी धन मिलेगा, जिससे गरीब परिवारों को स्वरोजगार का अवसर मिलेगा।
वोटिंग के दौरान विपक्ष का रुख
बजट सत्र के दौरान कुछ विपक्षी सदस्य सरकार की जवाबदेही से नाराज होकर वॉकआउट कर गए। उन्होंने कहा कि उपयोग प्रमाणपत्र (Utilisation Certificates) जैसे मुद्दों पर सरकार पहले से देरी कर रही है और ऐसे समय में भी नए फंड की मांग करना चिंताजनक है। उनका मानना था कि पहले प्रमाणपत्रों का समाधान करना जरूरी था।
समाज कल्याण विभाग के लिए बजट भी पास
अनुपूरक बिल के अलावा विधानसभा में सामाजिक कल्याण विभाग के लिए ₹724 करोड़ का अनुपूरक बजट भी अवीकृत किया गया। इसके साथ ही 2026-27 के लिए इसी विभाग के लिए ₹8,470 करोड़ की मांग भी पास की गई, जिससे अगले वित्त वर्ष के लिए योजनाओं की तैयारी भी सुनिश्चित होती है।
