Chhattisgarh News: छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ विकासखंड के ग्राम कमोसिनडांड निवासी जन्म से दिव्यांग गणेश राम यादव को महज 24 घंटे के भीतर ट्राइसाइकिल उपलब्ध कराई गई। एक समाचार में उनकी कठिन परिस्थितियों का उल्लेख सामने आने के बाद मुख्यमंत्री ने तत्काल संज्ञान लेते हुए जिला प्रशासन और समाज कल्याण विभाग को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
शासकीय अवकाश के दिन भी सक्रिय रहा प्रशासन
मुख्यमंत्री के निर्देश मिलते ही समाज कल्याण विभाग और जिला प्रशासन ने बिना देरी किए कार्रवाई शुरू कर दी। रविवार के शासकीय अवकाश के बावजूद अधिकारियों ने जनपद पंचायत धरमजयगढ़ के माध्यम से ट्राइसाइकिल की व्यवस्था की।
जब प्रशासनिक टीम गणेश राम यादव के घर पहुंची तो वे घर पर मौजूद नहीं थे। ऐसे में उनके बड़े भाई विचित्र यादव को ट्राइसाइकिल सौंपते हुए निर्देश दिए गए कि घर लौटते ही इसे गणेश राम को उपलब्ध कराया जाए।
हाथों के सहारे चलने को थे मजबूर
गणेश राम यादव जन्म से दिव्यांग हैं और आर्थिक तंगी के कारण वर्षों से ट्राइसाइकिल जैसी बुनियादी सुविधा से वंचित थे। पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्र में रहने के कारण उन्हें रोजमर्रा के काम, स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंचने और अन्य आवश्यक कार्यों के लिए हाथों के सहारे चलना पड़ता था।
मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बाद उन्हें ट्राइसाइकिल मिलने से अब उनका आवागमन पहले की तुलना में काफी आसान हो जाएगा।
परिवार ने जताया मुख्यमंत्री और प्रशासन का आभार
गणेश राम यादव के बड़े भाई विचित्र यादव ने कहा कि ट्राइसाइकिल मिलने से उनके भाई के जीवन में बड़ा बदलाव आएगा। अब वे स्वास्थ्य केंद्र, बैंक, पंचायत और अन्य आवश्यक स्थानों तक आसानी से पहुंच सकेंगे तथा अधिक आत्मनिर्भर जीवन जी पाएंगे।
परिवार की सदस्य चंद्रवती यादव ने बताया कि उनके पति विचित्र यादव और देवर गणेश राम यादव दोनों जन्म से दिव्यांग हैं तथा उन्हें नियमित रूप से दिव्यांग पेंशन मिलती है। परिवार को महतारी वंदन योजना का लाभ भी प्राप्त हो रहा है और राशन कार्ड के माध्यम से खाद्यान्न भी नियमित रूप से उपलब्ध कराया जा रहा है।
संवेदनशील शासन का उदाहरण बनी त्वरित कार्रवाई
स्थानीय ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और जिला प्रशासन की त्वरित कार्रवाई की सराहना करते हुए कहा कि जरूरतमंद व्यक्ति तक मात्र 24 घंटे में सहायता पहुंचना सरकार की संवेदनशील और जवाबदेह कार्यशैली का उदाहरण है। इस पहल से दिव्यांग गणेश राम यादव को न केवल आवागमन की सुविधा मिली है, बल्कि सम्मानजनक और आत्मनिर्भर जीवन की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ा है।
