Chhattisgarh News: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ग्रामीण आजीविका, महिला सशक्तिकरण और पारंपरिक हस्तशिल्प को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इसी दिशा में जशपुर जिले में ‘जशक्राफ्ट’ ब्रांड के माध्यम से बांस हस्तशिल्प को नई पहचान देने और स्थानीय कारीगरों को आधुनिक तकनीक एवं बाजार से जोड़ने की पहल शुरू की गई है।
एक माह का आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू
जशपुर विकासखंड की ग्राम पंचायत झोलांगा में 29 जून से 29 जुलाई तक एक माह का आवासीय बांस हस्तशिल्प प्रशिक्षण आयोजित किया जा रहा है। जिला पंचायत और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के संयुक्त प्रयास से चल रहे इस कार्यक्रम का उद्देश्य बांस हस्तशिल्प से जुड़े लगभग 150 परिवारों की आजीविका को मजबूत करना है।
वर्तमान में प्रशिक्षण के पहले बैच में 46 महिलाएं आधुनिक बांस हस्तशिल्प निर्माण की बारीकियां सीख रही हैं।
आधुनिक तकनीक और नए डिजाइन पर दिया जा रहा प्रशिक्षण
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को आधुनिक मशीनों के उपयोग, नए डिजाइन और बाजार की मांग के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण उत्पाद तैयार करने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके लिए गुजरात के सूरत से विशेषज्ञ प्रशिक्षकों को बुलाया गया है।
महिलाओं को जिन उत्पादों का निर्माण सिखाया जा रहा है, उनमें शामिल हैं—
- फैंसी ट्रे
- गुलदस्ते
- माचिया
- सजावटी वस्तुएं
- चटाई
- आकर्षक टोकरियां
- बांस का फर्नीचर
- सोफा और पलंग सहित अन्य उपयोगी उत्पाद
250 परिवारों की आजीविका से जुड़ा है बांस हस्तशिल्प
जशपुर और मनोरा विकासखंड में लगभग 250 परिवार वर्षों से बांस हस्तशिल्प के माध्यम से अपनी आजीविका चला रहे हैं। इनमें बड़ी संख्या में बिहान स्व-सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं शामिल हैं।
सरकार इन समूहों को—
- चक्रीय निधि
- सामुदायिक निवेश निधि (CIF)
- बैंक लिंकेज
- मुद्रा ऋण
जैसी वित्तीय सुविधाओं से जोड़कर उनके उद्यम को मजबूत कर रही है।
राष्ट्रीय बाजार तक पहुंचेंगे ‘जशक्राफ्ट’ उत्पाद
‘जशक्राफ्ट’ ब्रांड के तहत तैयार उत्पादों को रूरल मार्ट, राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर की प्रदर्शनियों और देशभर के बाजारों तक पहुंचाने की योजना बनाई गई है। इसके लिए डिजाइन और विपणन विशेषज्ञों की सेवाएं भी ली जा रही हैं, ताकि स्थानीय कारीगरों को उनके उत्पादों का बेहतर मूल्य और स्थायी बाजार मिल सके।
महिला सशक्तिकरण और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा
राज्य सरकार का मानना है कि यह पहल पारंपरिक बांस शिल्प को आधुनिक बाजार से जोड़ने के साथ-साथ महिला सशक्तिकरण, स्थानीय रोजगार सृजन और जनजातीय परिवारों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
जिला प्रशासन ने लक्ष्य रखा है कि अगले वर्ष तक हस्तशिल्प से जुड़े सभी स्व-सहायता समूहों की महिलाओं को ‘लखपति दीदी’ की श्रेणी में शामिल किया जाए, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था और अधिक आत्मनिर्भर बन सके।
