Punjab News: कान, नाक और गले की बीमारियों को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी, समय पर इलाज से बच सकती है जान

पंजाब
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Punjab News: कान से बार-बार पानी आना, कम सुनाई देना, लंबे समय तक नाक बंद रहना या मुंह का छाला ठीक न होना सामान्य समस्या लग सकती है। लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि इन लक्षणों को लंबे समय तक नजरअंदाज करना गंभीर बीमारी का कारण बन सकता है।

ईएनटी यानी कान, नाक और गले से जुड़ी बीमारियां बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक किसी को भी प्रभावित कर सकती हैं। इनमें कान का संक्रमण, सुनने की क्षमता कम होना, साइनस की समस्या और मुंह व जीभ का कैंसर शामिल है।

विशेषज्ञों के अनुसार, इनमें से ज्यादातर बीमारियों की समय पर पहचान हो जाए तो उनका सफल इलाज संभव है। जल्दी इलाज शुरू होने से स्थायी नुकसान और बड़े ऑपरेशन से भी बचा जा सकता है।

मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत 2030 मरीजों की हुई सर्जरी

पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत पात्र मरीजों को सरकारी और सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में एडवांस ईएनटी सर्जरी मुफ्त उपलब्ध कराई जा रही है।

राज्य स्वास्थ्य एजेंसी के आंकड़ों के अनुसार, अब तक करीब 2030 मरीजों की ईएनटी सर्जरी की गई है। इन सर्जरी पर लगभग 5.25 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं।

शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज न करने की सलाह

सिविल अस्पताल रूपनगर की ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. निधि गुप्ता ने कहा कि लोग अक्सर कान से पानी आने, सुनाई कम देने, नाक बंद रहने और मुंह के छालों जैसी समस्याओं को नजरअंदाज कर देते हैं।

शुरुआत में दर्द नहीं होने के कारण लोग डॉक्टर के पास नहीं जाते। लेकिन इलाज में देरी से स्थायी बहरापन, लंबे समय तक रहने वाली साइनस की बीमारी और मुंह का कैंसर जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं।

कान की बीमारियों के कारण सबसे ज्यादा सर्जरी

ईएनटी से जुड़ी बीमारियों में कान की समस्याएं सबसे ज्यादा देखने को मिलती हैं। कान में लंबे समय तक संक्रमण और सुनने की क्षमता कम होना सर्जरी के प्रमुख कारण हैं।

पंजाब राज्य स्वास्थ्य एजेंसी के आंकड़ों के अनुसार, पिछले साढ़े पांच महीनों में करीब 1050 कान की सर्जरी की गई हैं। इन पर लगभग 2.9 करोड़ रुपये खर्च किए गए।

इनमें 897 टाइम्पैनोप्लास्टी और 88 रेडिकल मास्टॉयडेक्टॉमी के साथ कान की चोट और बाहरी कान के ट्यूमर से जुड़ी सर्जरी शामिल हैं।

समय पर सर्जरी से वापस आ सकती है सुनने की क्षमता

डॉ. निधि गुप्ता के अनुसार, कान की ज्यादातर सर्जरी फटे हुए कान के पर्दे को ठीक करने और लंबे समय से मौजूद संक्रमण को हटाने के लिए की जाती हैं।

समय पर इलाज और सर्जरी होने से मरीज की सुनने की क्षमता में सुधार हो सकता है। साथ ही संक्रमण को कान की हड्डियों और आसपास के महत्वपूर्ण अंगों तक फैलने से रोका जा सकता है।

लंबे समय तक नाक बंद रहना भी हो सकता है बीमारी का संकेत

लगातार नाक बंद रहने की समस्या को लोग अक्सर सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन इससे नींद, काम करने की क्षमता और रोजमर्रा के जीवन पर असर पड़ सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, पुरानी साइनस की बीमारी, नाक की टेढ़ी हड्डी, नाक के अंदर बढ़े हुए टिश्यू और पॉलिप्स सांस लेने में परेशानी के प्रमुख कारण हो सकते हैं।

पंजाब में हुई करीब 900 नाक और साइनस की सर्जरी

मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत पंजाब में करीब 900 नाक और साइनस से जुड़ी सर्जरी की गई हैं। इन पर 2.1 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च किए गए।

इन सर्जरी में 395 फंक्शनल सेप्टो राइनोप्लास्टी, 354 सेप्टोप्लास्टी और 227 फंक्शनल एंडोस्कोपिक साइनस सर्जरी सहित अन्य ऑपरेशन शामिल हैं।

डॉक्टरों का कहना है कि कई मरीज वर्षों तक केवल नेजल स्प्रे का इस्तेमाल करते रहते हैं, लेकिन बीमारी के असली कारण का इलाज नहीं करवाते।

सही जांच और जरूरत पड़ने पर एंडोस्कोपिक सर्जरी से मरीज को लंबे समय तक राहत मिल सकती है।

मुंह के कैंसर के मामलों में देरी बन सकती है खतरनाक

मुंह और जीभ से जुड़ी सर्जरी की संख्या कान और नाक की सर्जरी से कम है, लेकिन डॉक्टरों के अनुसार ये मामले अधिक गंभीर हो सकते हैं।

पंजाब में करीब 80 मरीजों की मुंह और जीभ से जुड़ी सर्जरी की गई हैं। इन पर लगभग 25 लाख रुपये खर्च हुए।

इनमें मुंह, साइनस और गले के ट्यूमर निकालने, जीभ के ट्यूमर की सर्जरी, गर्दन की लिम्फ नोड्स निकालने और शरीर के दूसरे हिस्से से टिश्यू लेकर प्रभावित हिस्से को दोबारा बनाने जैसी जटिल सर्जरी शामिल हैं।

दो सप्ताह से ज्यादा रहने वाले मुंह के छाले को न करें नजरअंदाज

डॉ. निधि गुप्ता ने बताया कि मुंह का कैंसर लंबे समय तक ठीक नहीं होने वाले छाले, मुंह में सफेद या लाल धब्बे, जीभ में दर्द और निगलने में परेशानी जैसे लक्षणों से शुरू हो सकता है।

तंबाकू, गुटखा, सुपारी और शराब का सेवन मुंह के कैंसर के प्रमुख जोखिम कारणों में शामिल है।

डॉक्टरों का कहना है कि अगर मुंह का कोई छाला दो सप्ताह से अधिक समय तक ठीक नहीं होता है, तो तुरंत डॉक्टर से जांच करवानी चाहिए।

शुरुआती अवस्था में कैंसर का इलाज छोटे ऑपरेशन से संभव हो सकता है। लेकिन बीमारी का देर से पता चलने पर बड़ी सर्जरी, रिकंस्ट्रक्शन और अतिरिक्त इलाज की जरूरत पड़ सकती है।

इन लक्षणों पर तुरंत डॉक्टर से लें सलाह

विशेषज्ञों का कहना है कि कान से लगातार पानी आना, सुनाई कम देना, लंबे समय तक नाक बंद रहना, बार-बार साइनस का संक्रमण होना, आवाज बैठी रहना और मुंह का छाला दो सप्ताह से अधिक समय तक बने रहना गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है।

ऐसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत ईएनटी विशेषज्ञ से जांच करवानी चाहिए। समय पर बीमारी की पहचान और इलाज शुरू होने से मरीज जल्दी ठीक हो सकता है और बड़ी सर्जरी की जरूरत को भी कम किया जा सकता है।

मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत एडवांस ईएनटी सर्जरी उपलब्ध होने से मरीजों को इलाज की सुविधा मिल रही है। डॉक्टरों का कहना है कि इसका सबसे अधिक लाभ तभी मिलेगा, जब लोग बीमारी के शुरुआती लक्षणों को पहचानेंगे और समय पर डॉक्टर से जांच करवाएंगे।