Punjab News: फिल्म ‘सतलज’ को ओटीटी से हटाने पर AAP ने उठाए सवाल, बलतेज पन्नू ने भाजपा-कांग्रेस पर साधा निशाना

पंजाब
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Punjab News: आम आदमी पार्टी पंजाब ने मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा के जीवन पर बनी फिल्म ‘सतलज’ को ओटीटी प्लेटफॉर्म से हटाए जाने की कड़ी निंदा की है। पार्टी ने इसे पंजाब के इतिहास और अभिव्यक्ति की आजादी से जुड़ा गंभीर मामला बताया है।

चंडीगढ़ में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान AAP पंजाब के मीडिया इंचार्ज बलतेज पन्नू ने भाजपा, कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक दल पंजाब के इतिहास से जुड़ी सच्चाई को नई पीढ़ी तक पहुंचने से रोक रहे हैं।

‘नई पीढ़ी को पंजाब का इतिहास जानने का अधिकार’

बलतेज पन्नू ने कहा कि आज के डिजिटल दौर में फिल्में और डॉक्यूमेंट्री युवाओं को इतिहास के बारे में जानकारी देने का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुकी हैं।

उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी पंजाब में 1978, 1984 और 1990 के दशक के दौरान हुई घटनाओं के बारे में जानना चाहती है। ऐसे में ऐतिहासिक विषयों पर बनी फिल्मों को लोगों तक पहुंचने से रोकना कई सवाल खड़े करता है।

पन्नू ने कहा कि गंभीर ऐतिहासिक फिल्मों को बनाने के लिए वर्षों की रिसर्च और मेहनत की जरूरत होती है। लेकिन राजनीतिक विवाद और सेंसरशिप के डर से फिल्म निर्माता ऐसे विषयों पर काम करने से बचने लगे हैं।

कई बार बदला गया फिल्म का नाम

बलतेज पन्नू के अनुसार, फिल्म ‘सतलज’ को रिलीज होने से पहले कई परेशानियों और देरी का सामना करना पड़ा।

उन्होंने बताया कि पहले फिल्म का नाम ‘घलूघारा’ रखा गया था। बाद में सेंसर अधिकारियों की आपत्तियों के बाद इसका नाम बदलकर ‘पंजाब 95’ किया गया और आखिर में इसे ‘सतलज’ नाम से रिलीज किया गया।

पन्नू ने कहा कि ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज होने के केवल दो दिन बाद फिल्म को हटा दिया गया। उन्होंने इस फैसले पर सवाल उठाते हुए पूछा कि आखिर फिल्म को लोगों तक पहुंचने से क्यों रोका गया।

जसवंत सिंह खालरा के जीवन पर आधारित है फिल्म

फिल्म मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा के जीवन और उनके संघर्ष पर आधारित है।

बलतेज पन्नू ने कहा कि जसवंत सिंह खालरा ने पंजाब में हिंसा के दौर के दौरान कथित तौर पर मारे गए और अज्ञात बताकर अंतिम संस्कार किए गए लोगों के मामलों को सामने लाने का काम किया था।

उन्होंने कहा कि खालरा ने तरनतारन के श्मशान घाटों से रिकॉर्ड इकट्ठा किए और कई ऐसे मामलों की जानकारी सामने रखी, जिनमें कथित अज्ञात शव उन लोगों के थे, जिनके परिवार उन्हें लापता बता रहे थे।

कांग्रेस पर इतिहास छिपाने का लगाया आरोप

बलतेज पन्नू ने कांग्रेस पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि पंजाब में मानवाधिकार उल्लंघन से जुड़ी कई घटनाएं कांग्रेस सरकार और राष्ट्रपति शासन के दौरान हुई थीं।

उन्होंने आरोप लगाया कि इसी कारण कांग्रेस नहीं चाहती कि ऐसी फिल्मों के जरिए उस समय की घटनाओं की जानकारी नई पीढ़ी तक पहुंचे।

पन्नू ने कहा कि फिल्म को हटाने से यह सवाल खड़ा होता है कि क्या राजनीतिक दल पंजाब के इतिहास के कुछ हिस्सों को लोगों से छिपाना चाहते हैं।

भाजपा और केंद्र सरकार से मांगा जवाब

AAP नेता ने भाजपा और केंद्र सरकार पर भी निशाना साधा।

उन्होंने केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू से जवाब मांगते हुए पूछा कि फिल्म को ओटीटी प्लेटफॉर्म से किसके कहने पर हटाया गया।

पन्नू ने सवाल किया कि क्या फिल्म कांग्रेस के दबाव में हटाई गई या भाजपा सरकार ने खुद पंजाब के इतिहास से जुड़ी घटनाओं को लोगों तक पहुंचने से रोकने का फैसला किया।

अकाली दल के रवैये पर भी उठाए सवाल

बलतेज पन्नू ने शिरोमणि अकाली दल और उसके नेतृत्व पर भी निशाना साधा।

उन्होंने कहा कि आज अकाली दल के नेता फिल्म को लेकर सोशल मीडिया पर बयान दे रहे हैं, लेकिन जसवंत सिंह खालरा के परिवार को जब मदद की सबसे ज्यादा जरूरत थी, तब पार्टी ने उनका साथ नहीं दिया।

पन्नू ने जसवंत सिंह खालरा की पत्नी परमजीत कौर खालरा के एक वीडियो इंटरव्यू का जिक्र करते हुए दावा किया कि परिवार ने मदद के लिए तत्कालीन अकाली दल नेतृत्व से संपर्क किया था, लेकिन उन्हें अपेक्षित सहायता नहीं मिली।

‘ट्रुथ कमीशन’ के वादे को लेकर अकाली दल को घेरा

बलतेज पन्नू ने कहा कि अकाली दल ने 1996 के चुनावी घोषणा पत्र में पंजाब में कथित गैर-कानूनी अपहरण और हत्याओं की जांच के लिए ‘ट्रुथ कमीशन’ बनाने का वादा किया था।

उन्होंने आरोप लगाया कि 1997 में सरकार बनने के बाद अकाली दल ने अपने वादे को पूरा नहीं किया।

पन्नू ने दावा किया कि कथित मानवाधिकार उल्लंघन के मामलों में कार्रवाई करने के बजाय कई अधिकारियों को प्रमोशन दिए गए।

उन्होंने कहा कि अकाली दल का मौजूदा रुख उसके पिछले कार्यकाल के दौरान किए गए कामों से अलग है।

गवाह किरपाल सिंह रंधावा के मामले का किया जिक्र

बलतेज पन्नू ने पत्रकार के तौर पर अपने अनुभव का जिक्र करते हुए किरपाल सिंह रंधावा के मामले को भी उठाया।

उन्होंने दावा किया कि रंधावा को एक महत्वपूर्ण मामले में गवाही देने से रोकने के लिए उनके खिलाफ झूठे मुकदमे दर्ज किए गए थे।

पन्नू ने कहा कि बाद में अदालत ने रंधावा को बरी कर दिया और कथित तौर पर झूठा मामला दर्ज करने से जुड़े लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के आदेश दिए गए।

उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएं दिखाती हैं कि सच्चाई सामने लाने वाले लोगों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ा।

‘फिल्म हटाने से इतिहास नहीं मिटाया जा सकता’

बलतेज पन्नू ने कहा कि किसी फिल्म को ओटीटी प्लेटफॉर्म से हटाने या उस पर रोक लगाने से ऐतिहासिक घटनाओं को मिटाया नहीं जा सकता।

उन्होंने कहा कि जसवंत सिंह खालरा ने मानवाधिकारों के लिए संघर्ष किया और गंभीर खतरों के बावजूद अपनी आवाज उठाई।

पन्नू ने मांग की कि फिल्म ‘सतलज’ को तुरंत ओटीटी प्लेटफॉर्म पर वापस लाया जाए, ताकि पंजाब के लोग और खासकर युवा पीढ़ी राज्य के इतिहास से जुड़ी घटनाओं के बारे में जान सके।

आम आदमी पार्टी ने कहा कि राजनीतिक कारणों से फिल्मों और ऐतिहासिक विषयों को लोगों तक पहुंचने से रोकना गलत है और अभिव्यक्ति की आजादी का सम्मान किया जाना चाहिए।