Delhi News: दिल्ली सरकार ने राजधानी की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए ‘Our Monuments, Our Pride’ अभियान के तहत दो नई योजनाओं को मंजूरी दी है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इन योजनाओं को स्वीकृति दी गई, जिनका उद्देश्य दिल्ली सरकार के संरक्षण में आने वाले 75 ऐतिहासिक स्मारकों का संरक्षण, पुनर्स्थापन और समग्र विकास करना है।
कौन-सी हैं नई योजनाएं?
दिल्ली सरकार ने दो प्रमुख योजनाओं को मंजूरी दी है—
- दिल्ली मुख्यमंत्री स्मारक गोद योजना (Delhi Chief Minister Monument Adoption Scheme)
- स्मारकों के संरक्षण, पुनर्स्थापन एवं विकास कार्यों के लिए अनुदान योजना (Grant-in-Aid Scheme)
इन योजनाओं के माध्यम से ऐतिहासिक स्मारकों की संरक्षा के साथ-साथ वहां आने वाले पर्यटकों के लिए बेहतर सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
‘Monument Mitra’ बनकर गोद ले सकेंगे स्मारक
मुख्यमंत्री स्मारक गोद योजना के तहत सार्वजनिक उपक्रम, निजी कंपनियां, गैर-सरकारी संगठन (NGO), ट्रस्ट, शैक्षणिक संस्थान और अन्य योग्य संस्थाएं ‘Monument Mitra’ के रूप में किसी स्मारक को पांच वर्षों के लिए गोद ले सकेंगी।
संरक्षण कार्यों के लिए मिलेगी ₹2 करोड़ तक की सहायता
दूसरी योजना के तहत सरकार पात्र ट्रस्ट, विश्वविद्यालयों, शैक्षणिक संस्थानों, स्वायत्त निकायों और विशेषज्ञ संस्थाओं को स्मारकों के तकनीकी संरक्षण एवं पुनर्स्थापन के लिए अधिकतम ₹2 करोड़ तक की वित्तीय सहायता प्रदान करेगी।
सरकार का कहना है कि इससे ऐतिहासिक इमारतों का वैज्ञानिक तरीके से संरक्षण किया जा सकेगा और उनकी मूल विरासत सुरक्षित रहेगी।
75 ऐतिहासिक धरोहरों को मिलेगा लाभ
इन योजनाओं का लाभ उन स्मारकों को मिलेगा जो दिल्ली प्राचीन एवं ऐतिहासिक स्मारक तथा पुरातात्विक स्थल एवं अवशेष अधिनियम, 2004 के तहत संरक्षित हैं, लेकिन भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के अधिकार क्षेत्र में नहीं आते।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने क्या कहा?
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दोनों योजनाओं का उद्देश्य अलग-अलग है। योजना के तहत गोद लेने वाली संस्थाएं अपनी लागत से पर्यटक सुविधाओं का विकास और रखरखाव करेंगी, जबकि के माध्यम से विशेषज्ञ संस्थाओं को स्मारकों के संरक्षण और तकनीकी पुनर्स्थापन के लिए आर्थिक सहायता दी जाएगी।
दिल्ली की विरासत को मिलेगा नया आयाम
सरकार का मानना है कि इन योजनाओं से न केवल ऐतिहासिक धरोहरों का संरक्षण होगा, बल्कि राजधानी में सांस्कृतिक पर्यटन को भी नई गति मिलेगी। बेहतर सुविधाओं और व्यवस्थित रखरखाव से दिल्ली की विरासत को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलने की उम्मीद है।
