Punjab News: मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं आज देश और दुनिया के सामने बड़ी चुनौती बनकर उभर रही हैं। ऐसे समय में पंजाब सरकार की ‘मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना’ मानसिक रोगों से जूझ रहे लोगों के लिए राहत लेकर आई है। इस योजना के तहत अब डिप्रेशन, एंग्जायटी, सिजोफ्रेनिया, बाइपोलर डिसऑर्डर और नशा संबंधी मानसिक बीमारियों का कैशलेस इलाज सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध कराया जा रहा है।
भारत में करोड़ों लोग मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से प्रभावित
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NIMHANS) के अनुसार देश में लगभग 15 से 20 करोड़ लोग किसी न किसी मानसिक स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहे हैं। इसके बावजूद जागरूकता की कमी, सामाजिक संकोच और विशेषज्ञ डॉक्टरों की सीमित उपलब्धता के कारण बड़ी संख्या में लोग समय पर इलाज नहीं करा पाते।
81 मानसिक स्वास्थ्य पैकेज योजना में शामिल
पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना के तहत उपलब्ध 2300 चिकित्सा प्रक्रियाओं में से 81 पैकेज विशेष रूप से मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं के लिए आरक्षित हैं। इनमें डिप्रेशन, एंग्जायटी, सिजोफ्रेनिया, बाइपोलर डिसऑर्डर और तनाव से जुड़ी कई मानसिक बीमारियों का इलाज शामिल है।
आधुनिक उपचार सुविधाएं भी उपलब्ध
योजना के अंतर्गत मरीजों को केवल दवाइयों तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि इलेक्ट्रोकनवल्सिव थेरेपी (ECT), ट्रांसक्रेनियल मैग्नेटिक स्टिमुलेशन (TMS) जैसी आधुनिक उपचार सुविधाओं और आवश्यक जांचों को भी कवर किया गया है। इससे मरीजों को महंगे इलाज का आर्थिक बोझ नहीं उठाना पड़ता।
अब तक 457 मरीजों को मिला लाभ
राज्य स्वास्थ्य एजेंसी (SHA) के आंकड़ों के अनुसार अब तक 457 लाभार्थी मानसिक स्वास्थ्य पैकेजों के तहत सरकारी अस्पतालों में इलाज प्राप्त कर चुके हैं। इन सेवाओं के लिए लगभग 55 लाख रुपये के दावों का निपटान भी किया जा चुका है।
18 से 45 वर्ष आयु वर्ग सबसे अधिक प्रभावित
सिविल अस्पताल बरनाला के मनोचिकित्सक डॉ. गगनदीप सेखों के अनुसार 18 से 45 वर्ष आयु वर्ग के लोग मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के प्रति सबसे अधिक संवेदनशील हैं। उच्च शिक्षा का दबाव, रोजगार की अनिश्चितता, कार्यस्थल का तनाव, आर्थिक जिम्मेदारियां और रिश्तों से जुड़ी चुनौतियां इसके प्रमुख कारण हैं।
सोशल मीडिया और बदलती जीवनशैली बढ़ा रही तनाव
विशेषज्ञों का मानना है कि तेज रफ्तार जीवनशैली, परिवारों में कम होता संवाद, सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग और बढ़ती प्रतिस्पर्धा मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं को बढ़ाने वाले प्रमुख कारक बन रहे हैं। इसका सबसे अधिक असर युवाओं पर देखने को मिल रहा है।
योग और जागरूकता पर सरकार का फोकस
डॉ. बलबीर सिंह ने बताया कि ‘सीएम की योगशाला’ कार्यक्रम के माध्यम से योग को मानसिक स्वास्थ्य और भावनात्मक संतुलन का प्रभावी माध्यम बनाया जा रहा है। उनका कहना है कि शांत मन और स्वस्थ शरीर एक-दूसरे के पूरक हैं, इसलिए मानसिक स्वास्थ्य को भी शारीरिक स्वास्थ्य जितनी ही प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
समय पर इलाज से बच सकती हैं गंभीर समस्याएं
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि मानसिक बीमारियों के शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय रहते विशेषज्ञ की सलाह और उचित उपचार से बीमारी की गंभीरता को कम किया जा सकता है और लंबे समय तक होने वाली जटिलताओं से बचा जा सकता है।
मानसिक स्वास्थ्य के प्रति बदल रही सोच
पिछले कुछ वर्षों में लोगों के बीच मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता बढ़ी है। अब अधिक लोग यह समझने लगे हैं कि मानसिक बीमारियां भी अन्य शारीरिक बीमारियों की तरह ही होती हैं और उनका इलाज संभव है। कैशलेस स्वास्थ्य सुविधाओं के कारण मरीजों के लिए उपचार तक पहुंच और भी आसान हुई है।
पंजाब में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को मिल रही नई मजबूती
मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना के माध्यम से पंजाब सरकार मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को आम लोगों तक पहुंचाने का प्रयास कर रही है। यह पहल न केवल मरीजों को आर्थिक राहत दे रही है, बल्कि समाज में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
