Bihar News: बिहार सरकार ने आदिवासी समुदाय के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। राज्य के एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों में अब कक्षा 6 से 12 तक की पढ़ाई केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के पाठ्यक्रम के अनुसार कराई जाएगी। केंद्र सरकार से इस संबंध में आवश्यक अनुमति भी मिल चुकी है।
इस फैसले से हजारों आदिवासी छात्र-छात्राओं को राष्ट्रीय स्तर की शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।
तीन जिलों में संचालित हैं एकलव्य स्कूल
वर्तमान में बिहार में तीन एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय संचालित हो रहे हैं। ये विद्यालय पश्चिम चंपारण के बेलासड़ी, जमुई के आस्था और कैमूर के अधौरा में स्थित हैं।
प्रत्येक विद्यालय में लगभग 600 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। इस प्रकार करीब 1800 आदिवासी बच्चे इन स्कूलों में शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।
गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर सरकार का फोकस
राज्य के अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण मंत्री Lakhendra Paswan ने कहा कि सीबीएसई पैटर्न लागू होने के बाद इन विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता और बेहतर होगी।
उन्होंने बताया कि छात्रों को आधुनिक शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए डिजिटल लैब, कंप्यूटर शिक्षा और अंग्रेजी माध्यम के शिक्षकों की व्यवस्था भी की जाएगी।
प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में मिलेगी मदद
सीबीएसई पाठ्यक्रम लागू होने के बाद आदिवासी छात्रों को राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में भी लाभ मिलेगा।
सरकार का मानना है कि इससे छात्र-छात्राएं मेडिकल और इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं जैसे नीट और जेईई के साथ-साथ केंद्रीय विश्वविद्यालयों की प्रवेश परीक्षाओं में भी बेहतर प्रदर्शन कर सकेंगे।
आदिवासी क्षेत्रों के विकास पर जोर
2011 की जनगणना के अनुसार बिहार के 24 जिलों में लगभग 13.36 लाख आदिवासी आबादी निवास करती है। इनमें जमुई, कैमूर और पश्चिम चंपारण जिले आदिवासी बहुल क्षेत्र माने जाते हैं।
सरकार का उद्देश्य इन क्षेत्रों के बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना और उन्हें बेहतर भविष्य के अवसर उपलब्ध कराना है।
सुरक्षा व्यवस्था भी होगी मजबूत
कैमूर के अधौरा स्थित एकलव्य विद्यालय में पिछले वर्ष छात्राओं की सुरक्षा से जुड़ा मामला सामने आने के बाद सरकार ने सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने पर भी विशेष जोर दिया है।
विभाग का कहना है कि विद्यार्थियों की सुरक्षा, शिक्षा और समग्र विकास को ध्यान में रखते हुए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
आदिवासी शिक्षा को मिलेगी नई दिशा
विशेषज्ञों का मानना है कि सीबीएसई पाठ्यक्रम लागू होने से एकलव्य विद्यालयों के छात्रों को देशभर के विद्यार्थियों के समान शैक्षणिक अवसर मिलेंगे। इससे आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा का स्तर सुधरेगा और विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा तथा रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे।
यह पहल बिहार में आदिवासी शिक्षा को नई दिशा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
