Zee न्यूज़ के ‘DNA’ में होगी इस एंकर की एंट्री ?

सवाल बड़ा है..और अहम भी..क्योंकि जिस DNA को सुधीर चौधरी ने लोकप्रियता के शिखर पर पहुंचाया, आज की तारीख में उसे उतने दर्शक नहीं मिल रहे हैं जितने मिलने चाहिए। ऐसे में DNA को लेकर तरह तरह की चर्चा तेज हो गई है। सबसे बडा नाम निकल जो सामने आ रहा है वो है आजतक की सीनियर एंकर अंजना ओम कश्यप का।

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‘चौधरी’ जी की एंट्री, आजतक से विकेट चटकने शुरू

खबरों के मुताबिक 9 बजे के शो से दो प्रोड्यूसर शंशाक शुक्ला, पवन शर्मा ने इस्तीफा दे दिया। फिलहाल ये नोटिस पीरियड पर चल रहे हैं। अंदरखाने में हलचल ये भी कि है कि सिद्धार्थ त्रिपाठी भी चैनल का साथ छोड़ सकते हैं। आपको बता दें कि ये तीनों, चौधरी साहब और ज़ी न्यूज़ के खास शो DNA में अपनी अलग-अलग जिम्मेदारी निभा रहे थे। लेकिन इन्होंने ज़ी न्यूज से कटने में ही अपनी भलाई समझी और आजतक का दामन थाम लिया। अब..जबकि चौधरी साहब, यहां आ पहुंचे हैं। इन्होंने जान है तो जहान है…की तर्ज पर इस्तीफा दे दिया।

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इंडिया टुडे के अधिकारी ने ‘राष्ट्रपति’ द्रौपदी मुर्मू को लेकर किया विवादित पोस्ट, कंपनी ने निकाला

इंडिया टुडे के जनरल मैनेजर इंद्रनील चटर्जी ने महामहिम के खिलाफ बेहद आपत्तिजनक पोस्ट किया। हालांकि इंडिया टुडे ग्रुप ने अपने जरनल मैनेजर की टिप्पणियों पर खेद जताते हुए उसे बर्खास्त कर दिया है। चटर्जी का फेसबुक अकाउंट भी डी-एक्टिवेटेड है।

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राहुल देव…Coming soon

इस बार राहुल देव जी के साथ। अंग्रेजी-हिंदी पत्रकारिता के पुरोधाओं में से एक राहुल जी किसी टीवी सीरिज को पेश करने बरसों बाद आ रहे हैं। ये सुखद संयोग है- करियर के इस पड़ाव पर, खासतौर पर मेरे लिए। 2 दशकों में कभी एक दूसरे के साथ काम नहीं किया, अपनी तरफ से मैंने सिर्फ उन्हें पढ़ा, जाना और समझा। आज पहले ही दिन शूट के दौरान कुछ ऐसा कह गए अपन के बारे में- जिसे मैं ऐतिहासिक ही कहना चाहूंगा।

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जो लिखूंगा सच लिखूंगा…

मध्यप्रदेश में स्थानीय निकायों के चुनाव ने भाजपा को धीरे का झटका भी जोर से दिया है। भाजपा की जीत से ज्यादा चर्चा उसके सात महापौर प्रत्याशियों के हारने की है। भाजपा की भीतरी राजनीति में सब कुछ ठीक नहीं है ये इस बात का सबूत भी है। जनता ने कई जगह भाजपा के पार्षद जिता दिए लेकिन महापौर प्रत्याशी को लायक नहीं समझा। जहाँ जहाँ भाजपा हारी उसने वहां अपना पारम्परिक प्रचार छोड़ कर सोशल मीडिया के जरिये चुनाव जीतने की कोशिश की ,जिसमें वो असफल साबित हो गई। वहीँ दूसरी तरफ कांग्रेस के  पांच महापौर प्रत्याशी विजयी होने से कांग्रेस को इस संक्रमण काल में एक बूस्टर डोज मिल गया है। भाजपा के गलत प्रत्याशी चयन ने आम आदमी पार्टी और निर्दलीय तक को महापौर बनने तक का मौका दे दिया है।

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