Chhattisgarh News: नक्सल प्रभावित गांवों में पहली बार पहुंचे कलेक्टर, ग्रामीणों में दिखी नई उम्मीद

छत्तीसगढ़
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Chhattisgarh News: 23 मई 2026 को सुकमा जिले से सामने आई तस्वीरों ने बदलते बस्तर की नई कहानी को सामने रखा। कभी नक्सलवाद और डर के साए में रहने वाले दूरस्थ गांवों में अब विकास और सुशासन की रोशनी पहुंच रही है। कलेक्टर अमित कुमार और जिला पंचायत सीईओ मुकुंद ठाकुर खुद मोटरसाइकिल पर सवार होकर कोंटा विकासखंड के दुर्गम और पहुंचविहीन गांवों तक पहुंचे। उन्होंने भेज्जी, मैलासुर, दंतेषपुरम, बुर्कलंका, गछनपल्ली, बोदराजपदर और डब्बाकोंटा जैसे गांवों का दौरा कर ग्रामीणों से सीधा संवाद किया और कई महत्वपूर्ण विकास कार्यों को मंजूरी दी।

इन गांवों तक पहुंचना आसान नहीं था। उबड़-खाबड़ और पथरीले रास्तों से होकर अधिकारियों का दल गांवों तक पहुंचा। ग्रामीणों ने बताया कि आजादी के बाद पहली बार किसी कलेक्टर को अपने गांव में देखकर उन्हें खुशी और भरोसा महसूस हुआ। यह दौरा प्रशासन और ग्रामीणों के बीच विश्वास मजबूत करने वाला कदम बन गया।

चौपाल में सुनी गई ग्रामीणों की समस्याएं

दौरे के दौरान अधिकारियों ने बुर्कलंका में बन रहे “सुशासन परिसर” का निरीक्षण किया। इस परिसर में स्कूल, आंगनबाड़ी, पंचायत भवन, पीडीएस सेंटर और सामुदायिक भवन जैसी सुविधाएं एक ही परिसर में विकसित की जा रही हैं। कलेक्टर अमित कुमार ने इसे ग्रामीण विकास का प्रेरणादायी मॉडल बताया।

मैलासुर पंचायत में चौपाल लगाकर अधिकारियों ने सरपंच, पटेल, मुखिया और ग्रामीणों से जमीन पर बैठकर बातचीत की। उन्होंने सरकारी योजनाओं की स्थिति जानी और निर्माण कार्यों को समय पर पूरा करने के निर्देश दिए।

स्वास्थ्य और शिक्षा को मिली बड़ी प्राथमिकता

प्रशासन ने स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए। भेज्जी पंचायत में उप स्वास्थ्य केंद्र की स्वीकृति दी गई, जबकि मैलासुर में स्वास्थ्य केंद्र के लिए जगह चिन्हित करने के निर्देश दिए गए। गछनपल्ली में स्वास्थ्य कर्मचारियों के लिए स्टाफ क्वार्टर बनाने की मंजूरी भी दी गई, ताकि ग्रामीणों को चौबीसों घंटे इलाज की सुविधा मिल सके।

शिक्षा के क्षेत्र में दंतेषपुरम में बन रहे प्राथमिक स्कूल भवन को बारिश से पहले पूरा करने का निर्देश दिया गया। साथ ही दूरस्थ स्कूलों में शिक्षकों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया।

पानी, सड़क और आजीविका पर भी फोकस

ग्रामीणों की मांग पर मछली पालन को बढ़ावा देने के लिए तालाबों का चिन्हांकन किया गया और मछली बीज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए। दंतेषपुरम में नए डैम और तालाब निर्माण को मंजूरी मिली, वहीं पेयजल संकट दूर करने के लिए नए हैंडपंप और बोरिंग की स्वीकृति दी गई। जल जीवन मिशन के अधूरे कार्यों को जल्द पूरा करने के निर्देश भी अधिकारियों को दिए गए।

कलेक्टर ने पीएमजीएसवाई के तहत बोदराजपदर, मैलासुर, दंतेषपुरम, गछनपल्ली और बुर्कलंका को मुख्य सड़कों से जोड़ने के लिए प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए। प्रशासन का कहना है कि बारिश से पहले स्कूल, अस्पताल, सड़क और पुल-पुलिया जैसे जरूरी निर्माण कार्य तेजी से पूरे किए जाएंगे।

बस्तर में बदल रही विकास की पहचान

कलेक्टर अमित कुमार ने कहा कि नक्सलवाद से मुक्त हो चुके इन गांवों तक विकास पहुंचाना प्रशासन की सबसे बड़ी प्राथमिकता है। अब बस्तर की पहचान बंदूक नहीं, बल्कि विकास, सुशासन और नई उम्मीद बन रही है। प्रशासन के इस प्रयास से ग्रामीणों में भरोसा बढ़ा है और दूरस्थ गांवों में बदलाव की नई तस्वीर दिखाई देने लगी है।