Chhattisgarh News:’दीदी के गोठ’ में गूंजी आत्मनिर्भर बस्तर की आवाज, लखपति दीदियों की सफलता बनी महिलाओं के लिए प्रेरणा

छत्तीसगढ़
Spread the love

Chhattisgarh News: छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग मुख्यालय स्थित पंडित श्यामा प्रसाद मुखर्जी सभागार में आयोजित ‘दीदी के गोठ’ के 12वें संस्करण में महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता की प्रेरक तस्वीर देखने को मिली। कार्यक्रम में बस्तर के विभिन्न जिलों से हजारों महिलाओं ने हिस्सा लिया। इस दौरान लखपति दीदियों की सफलता की कहानियों ने महिलाओं में आत्मविश्वास और स्वरोजगार के प्रति नया उत्साह पैदा किया।

महिलाएं बन रही हैं बदलाव की ताकत: केदार कश्यप

वन, जलवायु परिवर्तन, परिवहन, सहकारिता एवं संसदीय कार्य मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि बस्तर की मातृशक्ति ने कठिन परिस्थितियों का सामना करते हुए समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की मजबूत भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि सरकार की योजनाएं तभी सफल होती हैं, जब महिलाएं उनका लाभ उठाकर आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ती हैं। उन्होंने बताया कि बिहान योजना, मध्याह्न भोजन योजना और अन्य सरकारी योजनाओं के माध्यम से महिलाएं आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त हो रही हैं।

सरकारी योजनाओं से बढ़ रही महिलाओं की भागीदारी

बस्तर सांसद महेश कश्यप ने कहा कि किसी भी समाज का विकास महिलाओं के सशक्तिकरण पर निर्भर करता है। उन्होंने दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM), लखपति दीदी योजना, महतारी वंदन योजना और प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी योजनाओं को महिलाओं की आर्थिक प्रगति का आधार बताया।

स्वरोजगार से बदल रही महिलाओं की जिंदगी

चित्रकोट विधायक विनायक गोयल ने कहा कि बस्तर की महिलाएं अब केवल घरेलू जिम्मेदारियों तक सीमित नहीं हैं। वे मुर्गीपालन, बकरीपालन, मत्स्य पालन, सब्जी उत्पादन और अन्य स्वरोजगार गतिविधियों से जुड़कर परिवार की आय बढ़ा रही हैं और आत्मनिर्भर बन रही हैं।

लखपति दीदियों का सम्मान, सफलता की कहानियों ने बढ़ाया हौसला

कार्यक्रम में नीतू झा, सुगनी कश्यप और हेमबती नाग सहित कई सफल लखपति दीदियों को सम्मानित किया गया। उन्हें प्रमाण-पत्र और सहायता राशि के चेक भी प्रदान किए गए।

इस अवसर पर कोंडागांव की नम्रता पटेल ने बताया कि बिहान योजना के तहत बैंक लिंकेज और 5 लाख रुपये के ऋण की मदद से उन्होंने अपने ‘अमृत तुल्य’ चाय एवं नाश्ता कैफे का विस्तार किया। आज उनके व्यवसाय से प्रतिदिन लगभग 5,000 रुपये की आय हो रही है।

आत्मनिर्भर बस्तर की दिशा में मजबूत पहल

कार्यक्रम में महिलाओं ने सरकारी योजनाओं से मिले लाभ और अपने अनुभव साझा किए। संवाद, सम्मान और प्रेरणा से भरपूर ‘दीदी के गोठ’ का यह आयोजन महिला सशक्तिकरण, स्वरोजगार और आत्मनिर्भर बस्तर के लक्ष्य को नई मजबूती देने वाला साबित हुआ। सरकार का उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से सक्षम बनाकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना और उन्हें विकास की मुख्यधारा से जोड़ना है।