Punjab News: पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा है कि पंजाब के चारों प्रमुख हवाई अड्डों के नामकरण को राज्य के महान गुरुओं, संतों और शहीदों के नाम पर रखा जाएगा। यह घोषणा उन्होंने लुधियाना के हलवारा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के नए टर्मिनल भवन के उद्घाटन के दौरान की, जो राज्य की आध्यात्मिक और क्रांतिकारी विरासत का सम्मान करेगी।
शहीद करतार सिंह सराभा के नाम पर हवाई अड्डा
सीएम मान ने कहा कि हलवारा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का नाम शहीद करतार सिंह सराभा के नाम पर रखा जाना चाहिए। करतार सिंह सराभा पंजाब और भारत की आज़ादी के पहले चरण के सबसे युवा और महत्वपूर्ण शहीदों में से एक थे, जिन्होंने 19 वर्ष की उम्र में अपने प्राणों की आहुति दी।
उनके बलिदान को याद करते हुए मान ने कहा कि उनकी प्रेरणा ने भगत सिंह जैसे और कई स्वतंत्रता सेनानियों को स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेने के लिए प्रेरित किया। ऐसे महान व्यक्तियों के नाम पर हवाई अड्डों का नामकरण पंजाब की वीरान और प्रेरणादायक विरासत को युवा पीढ़ी के सामने जीवित रखेगा।

चारों हवाई अड्डों का नामकरण
सीएम ने बताया कि पंजाब के चार प्रमुख हवाई अड्डों में से दो पहले ही शहीद भगत सिंह और गुरु रविदास महाराज जी के नामों पर रखे जा चुके हैं।
- श्री गुरु रामदास अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, अमृतसर
- श्री गुरु रविदास महाराज जी हवाई अड्डा, आदमपुर
- शहीद भगत सिंह हवाई अड्डा, मोहाली
- आने वाला होगा शहीद करतार सिंह सराभा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, हलवारा
भगवंत मान ने कहा कि इससे राज्य की आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और आज़ादी की लड़ाई की गाथा और भी मजबूती से आगे आएगी और लोगों तक पहुंचेगी।

आधुनिक ढांचे के साथ गर्व की पहचान
नए टर्मिनल भवन के उद्घाटन के मौके पर सीएम ने कहा कि पंजाब तेजी से विकसित हो रहा है, और इसके आधुनिक ढांचे को राज्य की विरासत से जोड़ना सम्मान की बात है। उन्होंने केंद्र से मोहाली हवाई अड्डे के अंतरराष्ट्रीय संपर्क को और विस्तार देने की भी अपील की, ताकि राज्य के लोगों को बेहतर यात्रा सुविधाएँ मिल सकें।
मान ने यह भी बताया कि राज्य भविष्य में अन्य हवाई अड्डों के नामकरण के लिए भी भारत सरकार के साथ विचार-विमर्श जारी रखेगा, जिससे आम नागरिकों में देशप्रेम और वीरता का संदेश फैल सके।
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की यह पहल पंजाब की आध्यात्मिक, क्रांतिकारी और सांस्कृतिक विरासत को सम्मान देने के लिए महत्वपूर्ण है। गुरुओं और शहीदों के नाम पर हवाई अड्डों का नाम रखना न सिर्फ समर्पण का प्रतीक है, बल्कि आने वाली पीढ़ी को देशभक्ति और इतिहास की गहराई से परिचित करने वाला कदम भी है।
